जेपीएससी के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (एफआरओ) परीक्षा में धांधली और पैसे के खेल का एक बड़ा मामला सामने आया है। सीआईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि इन दोनों परीक्षाओं में करीब 100 अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उन्हें प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा में पास कराने की सेटिंग की गई थी। केस में गिरफ्तार आरोपी अभय तिवारी और टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह के बयानों के अनुसार, पूरी परीक्षा प्रक्रिया में तीन अलग-अलग तरीकों से धांधली की जाती थी।
100 अभ्यर्थियों से 5 करोड़ की वसूली
पीटी में प्रति छात्र पांच लाख रुपये के हिसाब से लगभग 100 अभ्यर्थियों से करीब पांच करोड़ रुपये की वसूली की गई थी। मुख्य परीक्षा में जिन छात्रों का उत्तर ठीक-ठाक लिखा होता था, उनके अंक बढ़ाने के लिए जांचकर्ताओं व प्रोफेसरों से संपर्क कर नंबर बढ़वाए जाते थे। इसके लिए हजारीबाग व रांची में अलग-अलग जगहों पर सॉल्वर गैंग के सदस्यों को बैठाकर उत्तर पुस्तिकाएं लिखवायी गई थीं.
स्ट्रांगरूम से बाहर निकाली गई थीं उत्तरपुस्तिकाएं: जिन अभ्यर्थियों को उत्तर नहीं पता होते थे, उनकी उत्तर पुस्तिकाएं सीधे स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर निकाली जाती थीं और मॉडल उत्तर उपलब्ध कराकर उनसे उत्तर लिखवाए जाते थे। जांच में सामने आया कि अभ्यर्थियों की खाली ओएमआर शीट भरने के लिए विशेष रूप से लखनऊ और दिल्ली से टीम बुलाई गई थी। वहीं, आरोपी प्रदीप कुमार सिंह ने कबूला कि उसने जेपीएससी के स्ट्रॉन्ग रूम से 30 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं बाहर निकालकर सौंपी थीं, जिन्हें बाहर लिखवाने के बाद वापस जमा कराया गया। आरोपी संजय के अनुसार, एफआरओ मेन्स के लगभग 25 और एसीएफ मेन्स के लगभग 15 अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं में पीडीएफ एडिटर के माध्यम से बदलाव करके उन्हें पास कराया गया।
1.20 करोड़ का नकद लेनदेन और आगे की कार्रवाई
आरोपी रामबीर के बयान के मुताबिक, अभय तिवारी, धर्मेंद्र और आनंद ने उसे 15 अभ्यर्थियों का रोल नंबर दिया था, जिसमें प्रति कैंडिडेट आठ से 10 लाख रुपये में बात तय हुई थी। इस काम के एवज में अभय तिवारी ने उसे 1.20 करोड़ रुपये नकद दिए थे। मुख्य परीक्षा के पेपर रांची और हजारीबाग में बाहर लिखे गए थे। सीआईडी अब इन बयानों का भौतिक सत्यापन कर रही है और नतीजों के आधार पर अनुचित माध्यमों से पास होने वाले अभ्यर्थियों तथा इसमें शामिल अधिकारियों/बिचौलियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है।

