झारखंड सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर नियुक्त कर्मियों को हटाए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली तीन अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई .
मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रौशन की कोर्ट ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा एवं फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी. कोर्ट की तरफ से चयनित अभ्यर्थियों को वापस काम पर लेने का आदेश दिया गया है.
कोर्ट ने कहा कि नैसर्गिक न्याय के तहत इन्हें नहीं हटाया जा सकता है. कानून की उचित प्रक्रिया बिना अपनाये इन्हें हटाया गया है, जो संवैधानिक रूप से गलत है. कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से 15 सितंबर तक जवाब मांगा है.
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से यह कहा गया कि सीआईडी जांच के दौरान अब तक 40 प्रतिशत गड़बड़ी की बात सामने आयी है. आगे की जांच अभी जारी है. सरकार की बात सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि 40 प्रतिशत की गलती की वजह से 60 प्रतिशत को सजा नहीं दी जा सकती है. जांच के दौरान मिली गड़बड़ी के मामले के फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाये.
अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी. प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अधिवक्ता प्रेरणा झुनझुनवाला व पीएएस पति ने पक्ष रखा

