दिशा सालियान की मौत के मामले में CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की है। इससे करीब छह साल पुराने इस मामले ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को दिशा सालियान के पिता की याचिका पर CBI जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद CBI ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की।
CBI की कार्रवाई के बाद सुशांत सिंह राजपूत के चचेरे भाई और बीजेपी विधायक नीरज सिंह बब्लू ने दावा किया कि अगर दिशा सालियान की मौत से जुड़े आरोपियों तक जांच पहुंचती है, तो सुशांत की मौत के मामले से जुड़े कई सवाल भी स्पष्ट हो सकते हैं।
नीरज बब्लू बोले- दिशा केस सुलझा तो सुशांत केस का राज खुलेगा
नीरज सिंह बब्लू ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दिशा सालियान मामले की जांच के दौरान जिम्मेदार लोगों की पहचान होगी और उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा। उनके मुताबिक, दिशा सालियान की मौत और सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बीच संबंध को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि दिशा मामले में यदि सच्चाई सामने आती है, तो सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े सवालों का भी जवाब मिल सकता है। हालांकि, ये दावे विधायक के हैं और जांच एजेंसियों द्वारा सुशांत की मौत को हत्या साबित करने वाला कोई नया निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
उद्धव ठाकरे सरकार पर लगाए सबूत मिटाने के आरोप
नीरज बब्लू ने महाराष्ट्र की तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उस समय दोनों मामलों को दबाने की कोशिश हुई और जांच से जुड़े सबूतों को नष्ट कर दिया गया।
उनके अनुसार, जब बिहार में सुशांत सिंह राजपूत मामले की CBI जांच की मांग उठी, तब तक कई महत्वपूर्ण तथ्य और सबूत कथित तौर पर खत्म हो चुके थे।
हालांकि, इन आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई न्यायिक निष्कर्ष नहीं है जिसमें यह साबित हुआ हो कि तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार ने सुशांत मामले के सबूत नष्ट करवाए थे। इससे पहले बीजेपी विधायक राम कदम ने भी मार्च 2025 में ऐसे ही आरोप लगाते हुए सुशांत मामले की SIT जांच की मांग की थी।
14 जून 2020 को हुई थी सुशांत सिंह राजपूत की मौत
सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। उनकी मौत के बाद मुंबई पुलिस ने जांच शुरू की थी। बाद में मामला CBI को सौंपा गया और अगस्त 2020 में CBI ने FIR दर्ज की थी।
मामले को लेकर शुरुआत से ही कई तरह के सवाल और दावे सामने आते रहे। सुशांत के परिवार ने भी उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच की मांग की थी।
CBI की क्लोजर रिपोर्ट में क्या कहा गया था?
सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े मामले में CBI ने मार्च 2025 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, जांच एजेंसी को सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे।
यानी, मौजूदा स्थिति में यह कहना कि सुशांत सिंह राजपूत की हत्या साबित हो चुकी है, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। उनके परिवार की ओर से मामले को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन CBI की क्लोजर रिपोर्ट में हत्या या आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप साबित नहीं हुआ।
8 जून 2020 को हुई थी दिशा सालियान की मौत
दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। उनकी मौत सुशांत सिंह राजपूत की मौत से छह दिन पहले हुई थी। यही वजह रही कि दोनों घटनाओं को लेकर समय-समय पर कई तरह के सवाल और दावे सामने आते रहे हैं।
शुरुआती जांच में दिशा की मौत को आत्महत्या माना गया था। बाद में मामले को लेकर दोबारा जांच और SIT की कार्रवाई की खबरें सामने आईं। अब बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की है।
अब CBI जांच पर टिकी निगाहें
दिशा सालियान मामले में CBI की FIR के बाद जांच एजेंसी के सामने अब घटनाक्रम, उपलब्ध साक्ष्यों और पहले हुई जांच से जुड़े पहलुओं की पड़ताल का सवाल है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह स्पष्ट होगा कि एजेंसी को क्या नए तथ्य मिलते हैं और उनका कानूनी महत्व क्या है।
फिलहाल नीरज बब्लू के बयान ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर पुरानी बहस को फिर तेज कर दिया है। विधायक का दावा है कि दिशा सालियान मामले की सच्चाई सामने आने पर सुशांत की मौत से जुड़े सवालों के जवाब भी मिल सकते हैं। दूसरी ओर, सुशांत मामले में CBI की पहले दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को भी मौजूदा घटनाक्रम के साथ ध्यान में रखना जरूरी है।
नोट: सुशांत सिंह राजपूत की हत्या और तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार द्वारा सबूत मिटाने संबंधी बातें वर्तमान में अलग-अलग राजनीतिक/परिवारिक दावों का हिस्सा हैं; इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं प्रस्तुत किया जा सकता

