पटना सहित पूरे बिहार बिहार में नकली और नशीली दवाओं के कारोबार का नया तरीका सामने आया है. अब तस्कर दवाओं को कूरियर कंपनियों के माध्यम से बिहार और बिहार से बाहर भेज रहे हैं. पटना की करीब एक दर्जन संदिग्ध कूरियर कंपनियां ड्रग विभाग के रडार पर हैं. इन कंपनियों के जरिये बिना बिल, बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन और बिना लाइसेंस के नशीली दवाएं, एंटीबायोटिक और महंगी ब्रांडेड दवाओं की नकली खेप भेजी जा रही है.
कैसे हुआ मामले का खुलासा?
मामले का खुलासा तब हुआ, जब हाल में औषधि विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कई पार्सलों में कोडीन युक्त कफ सिरप, ट्रामाडोल, अल्प्राजोलम जैसी नशीली दवाएं और कुछ नामी कंपनियों के नाम पर बनी नकली दवाएं बरामद हुई. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ये पार्सल पटना के कंकड़बाग, पत्रकार नगर, राजेंद्र नगर, ट्रांसपोर्ट नगर और फुलवारीशरीफ स्थित कूरियर कंपनियों के गोदामों से बुक किये जा रहे थे.
स्टेट ड्रग कंट्रोलर ने बनायी विशेष टीम
इस गंभीर मामले को देखते हुए स्टेट ड्रग कंट्रोलर नित्यानंद क्रिशलय ने एक विशेष जांच टीम बनायी है. इसमें ड्रग इंस्पेक्टर सहित कुल 16 सदस्य शामिल किये गये हैं. टीम में औषधि निरीक्षकों के साथ-साथ पुलिस व इंटेलिजेंस के अधिकारी भी शामिल हैं. टीम को निर्देश दिया गया है कि संदिग्ध कूरियर कंपनियों की पहचान कर उनके गोदामों, बुकिंग सेंटर व ट्रांजिट हब पर छापेमारी की जाये. साथ ही यह भी पता लगाया जाये कि इन कंपनियों को दवाएं कौन सप्लाइ कर रहा है और कहां-कहां भेजी जा रही हैं.
दवाओं की जगह लिखीं जा रही फूड सप्लीमेंट या कॉस्मेटिक
कई कूरियर कंपनियां बिना किसी दस्तावेज के ही पार्सल बुक कर रही हैं. पार्सल पर दवाओं की जगह जेनरल आइटम, कॉस्मेटिक या फूड सप्लीमेंट लिखकर भेजा जा रहा है. कुछ कंपनियां तो रात के समय माल की बुकिंग और डिस्पैच कर रही हैं
ऐसे हो रहा है नशीली व नकली दवाओं का कुरियर से खेल
जांच में सामने आया है कि नकली दवा बनाने वाले गिरोह पहले पटना और आसपास के इलाकों में छोटे-छोटे गोदामों में दवाएं तैयार करते हैं. फिर इन्हें कूरियर कंपनियों से छोटे-छोटे पार्सलों में पटना के अलावा बिहार व यूपी, बंगाल, झारखंड के राज्यों में भेज दिया जाता है. नशीली दवाओं की बड़ी खेप को बिहार के सीमावर्ती जिलों से होते हुए नेपाल और अन्य राज्यों में भी भेजने की सूचना है. विभाग को यह भी जानकारी मिली है कि कुछ मेडिकल स्टोर संचालक भी बिना लाइसेंस के ऑनलाइन ऑर्डर पर कूरियर से दवाएं मंगवा रहे है और ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं.
जारी होगा नोटिस
स्टेट ड्रग कंट्रोलर नित्यानंद क्रिश्लय ने स्पष्ट किया है कि बिना लाइसेंस और बिना बिल के दवाओं का परिवहन और बिक्री गंभीर अपराध है. संदिग्ध कूरियर कंपनियों का लाइसेंस रद्द करने व संचालकों पर एफआइआर दर्ज करने की तैयारी है. साथ ही संबंधित कूरियर कंपनियों को नोटिस जारी कर पूछा जायेगा कि उन्होंने किन दस्तावेजों के आधार पर दवा वाले पार्सल बुक किये. विभाग ने सभी कूरियर कंपनियों को चेतावनी दी है कि दवाओं की बुकिंग के समय वैध बिल, डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन और विक्रेता का ड्रग लाइसेंस अनिवार्य रूप से जांचा जाये.

