झारखंड से नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र सरकार की मुहिम लगभग समाप्त हो गई है। इस अभियान के तहत मार्च 2026 में राज्य से नक्सलियों का सफाया कर दिया गया है। बावजूद इसके आज भी जंगलों से खतरा कम नहीं हुआ है। नक्सल प्रभावित रहे जंगलों में आज भी मौत का खौफनाक जाल बिछा हुआ है। जहां कदम कदम पर खतरा बरकरार है।
हथियारों का जखीरा बरामद
अब इस खतरे से निपटने की मुहिम सुरक्षा बलों ने शुरू कर दी है। पर जंगलों में छिपाए गए हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक अब भी सुरक्षाबलों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। सुरक्षा बलों के इस सर्च अभियान में कहीं केन बम मिल रहे हैं, तो कहीं SLR, कार्बाइन और राइफल जैसे हथियारों का जखीरा बरामद हो रहे हैं। सुरक्षा बलों की इस खास मुहिम का एक ही मकसद है जंगल की जमीन से मौत के सामनों को निकाल कर स्वच्छ और सुरक्षित बनाना, ताकि किसी आम लोगों और यहां तक जंगली जानवर भी गलती से इसका शिकार न बने।
नक्सलियों के इनपुट पर छापेमारी
अभी हाल के दिनों में पुलिस की गिरफ्त में आए नक्सलियों और आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से पूछताछ में मिले इनपुट और खुफिया सूचनाओं के आधार पर जंगलों में हथियारों के संभावित ठिकानों की पहचान की जा रही है। जरूरत पड़ने पर पुलिस निशानदेही पर संबंधित इलाकों में भी ले जा रही है। सुरक्षाबलों की कोशिश है कि जंगलों में छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटकों को सही सलामत बरामद कर भविष्य में उनके दुरुपयोग की आशंका को खत्म किया जाए।
इसी कर्म में शुक्रवार की अल सुबह पारसनाथ पहाड़ी क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीम ने जिख्वाबेड़ा जंगल के पास सर्च ऑपरेशन के दौरान भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद किया है।
विभिन्न जंगलों से हथियार बरामद
बरामद सामग्री में करीब पांच किलोग्राम का एक केन बम और ग्रेनेड बनाने में इस्तेमाल होने वाले लोहे के 38 अर्धनिर्मित शेल शामिल हैं। अभी अभियान जारी है। संभावना है कि और बड़ी कामयाबी सुरक्षा बलों को मिलेगी। इधर सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई थाना क्षेत्र के बुरूहातू जंगल में सशस्त्र सीमा बल और झारखंड पुलिस के संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान छह घातक हथियार बरामद किए जाने की सूचना मिली है। बरामद हथियारों में एक 7.62 एमएम SLR, एक 9 एमएम कार्बाइन, एक रिवॉल्वर और तीन .303 राइफल शामिल हैं। जबकि कभी माओवादियों का प्रमुख ठिकाना रहे गढ़वा के बूढ़ा पहाड़ की तलहटी में स्थित तुरेर गांव के समीप जंगल से सुरक्षाबलों ने दो गैस सिलेंडर बरामद किए हैं।
सूचना मिलने के बाद सीआरपीएफ और बड़गड़ थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने वरीय अधिकारियों के निर्देश पर जंगल में छापेमारी अभियान चलाया। इसी दौरान दोनों गैस सिलेंडर बरामद हुए। यह अभियान अभी जारी रखने की बात कही जा रही है। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक जंगल पूर्ण रूप से सुरक्षित न हो जाए।

