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    Home»Breaking News»20 लाख का इनामी नक्सली रविंद्र गंझू गिरफ्तार, रातभर झाड़ियों में छिपे रहे कोबरा जवान
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    20 लाख का इनामी नक्सली रविंद्र गंझू गिरफ्तार, रातभर झाड़ियों में छिपे रहे कोबरा जवान

    AdminBy AdminJuly 14, 2026No Comments6 Mins Read
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    रांची/लातेहार। झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के रीजनल कमांडर और 20 लाख रुपये के इनामी नक्सली रविंद्र गंझू उर्फ सुरेंद्र गंझू को सोमवार सुबह लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड स्थित उसके पैतृक गांव से गिरफ्तार कर लिया गया। इस ऑपरेशन की सबसे खास बात यह रही कि कोबरा (CoBRA) के जवानों ने पूरी रात सादा वेश में झाड़ियों में छिपकर निगरानी की और सुबह होते ही नक्सली को उसके घर के बाहर से बिना गोली चले धर दबोचा।

    रविंद्र गंझू पर झारखंड सरकार की ओर से 15 लाख रुपये और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसकी गिरफ्तारी को हाल के वर्षों में झारखंड में नक्सल विरोधी अभियानों की सबसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

    पूरी रात झाड़ियों में छिपे रहे जवान

    सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के खुफिया विंग को सूचना मिली थी कि रविंद्र गंझू कई वर्षों बाद अपने गांव स्थित घर पहुंचा है। सूचना मिलते ही कोबरा बटालियन के पांच विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान सिविल ड्रेस में रविवार रात ही लातेहार के चंदवा थाना क्षेत्र की लाधूप पंचायत स्थित बांझीटोला गांव पहुंच गए।

    जवानों ने घर के आसपास की झाड़ियों और सुरक्षित स्थानों पर पूरी रात निगरानी रखी। किसी भी प्रकार की हलचल पर नजर बनाए रखी गई ताकि नक्सली को भनक न लगे।

    सुबह घर से निकलते ही दबोचा

    सोमवार सुबह जैसे ही रविंद्र गंझू घर से बाहर निकला, जवानों ने उसे घेर लिया। खतरे का अंदेशा होते ही वह भागने लगा, लेकिन कोबरा के जवानों ने उसका पीछा किया और कुछ ही दूरी पर उसे पकड़ लिया।

    ऑपरेशन के दौरान पहले से तैनात बैकअप टीम भी मौके पर पहुंच गई। इसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच उसे लातेहार ले जाया गया। खास बात यह रही कि पूरे ऑपरेशन में एक भी गोली नहीं चली और बिना किसी मुठभेड़ के कुख्यात नक्सली गिरफ्तार कर लिया गया।

    हथियार भी बरामद

    गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा बलों ने उसके ठिकाने की तलाशी ली। वहां से एक AK-56 राइफल, एक पिस्टल और एक देशी कट्टा बरामद किया गया। पुलिस इन हथियारों की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल किन-किन घटनाओं में किया गया था।

    कई जिलों में था आतंक

    रविंद्र गंझू लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड के हेसला मौजा अंतर्गत बांझीटोला गांव का रहने वाला है। उस पर लातेहार, लोहरदगा, गुमला, पलामू और आसपास के कई जिलों में हत्या, पुलिस पर हमला, लेवी वसूली, विस्फोट और हथियार लूट सहित 55 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह लंबे समय से झारखंड में माओवादी गतिविधियों का संचालन कर रहा था और कई बड़े हमलों की साजिश में शामिल रहा है।

    पुलिस के लिए था बड़ा सिरदर्द

    रविंद्र गंझू को झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से तलाश रही थीं। बताया जाता है कि वह अत्याधुनिक इंटरसेप्टर डिवाइस का इस्तेमाल कर पुलिस वायरलेस की बातचीत तक सुन लेता था।

    वह आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल में भी माहिर था और अपने दस्ते को लगातार प्रशिक्षण देता था। यही वजह थी कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए वह सबसे वांछित नक्सलियों में शामिल था।

    अमित शाह की सभा वाले दिन हुए हमले का मुख्य आरोपी

    22 नवंबर 2019 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चंदवा में जनसभा आयोजित थी। उसी दिन लातेहार जिले के लुकुईया मोड़ के पास नक्सलियों ने पुलिस दल पर घात लगाकर हमला कर दिया था।

    इस हमले में चार पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी और कई हथियार लूट लिए गए थे। जांच में रविंद्र गंझू को इस पूरे हमले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था।

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया था कि कुछ स्थानीय सहयोगियों ने नक्सलियों की मदद की थी। हमला सफल होने के बाद रविंद्र ने अपने सहयोगियों को नकद इनाम भी दिया था।

    एनआईए को भी थी तलाश

    राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी कई मामलों में रविंद्र गंझू की तलाश कर रही थी। वर्ष 2022 में लातेहार-लोहरदगा सीमा पर बुलबुल जंगल में चलाए गए ऑपरेशन डबल बुल के दौरान बड़ी मात्रा में हथियार और नक्सली सामग्री बरामद हुई थी।

    इसके अलावा गारू क्षेत्र में बरामद हथियारों और नक्सली नेटवर्क की जांच में भी उसका नाम सामने आया था। एनआईए पहले ही उसके गांव स्थित मकान को सील कर चुकी थी। जांच एजेंसी का दावा था कि यह मकान लेवी से वसूली गई रकम से बनाया गया था।

    पत्नी ने क्या कहा?

    गिरफ्तारी के बाद रविंद्र गंझू की पत्नी ललिता देवी ने दावा किया कि उनके पति पिछले पांच-छह वर्षों से संगठन से दूर थे और खेती-किसानी में समय बिता रहे थे।

    उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह रविंद्र खेत जोतने की तैयारी कर रहे थे। तभी सिविल ड्रेस और पुलिस वर्दी में आए जवानों ने पूरे घर को चारों ओर से घेर लिया। उन्हें देखकर रविंद्र भागने लगे, लेकिन जवानों ने दौड़ाकर पकड़ लिया।

    ललिता देवी ने पुलिस से मांग की कि उनके पति को कानून के अनुसार अदालत में पेश किया जाए और पूरी न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाए।

    पूछताछ में मिल सकते हैं कई अहम सुराग

    पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रविंद्र गंझू से पूछताछ के दौरान झारखंड में सक्रिय माओवादी नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई, लेवी वसूली और संगठन के अन्य सक्रिय सदस्यों के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं।

    सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने उसके अलावा दो अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ जारी है।

    बड़ी सफलता मान रही हैं सुरक्षा एजेंसियां

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पिछले दो वर्षों में यह सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस का सबसे सफल नक्सल विरोधी अभियान माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी से पलामू और रांची प्रमंडल में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है और नेतृत्व कमजोर हुआ है।

    हालांकि पुलिस का कहना है कि पूछताछ और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।

    निष्कर्ष:
    20 लाख के इनामी माओवादी रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बिना गोली चले किए गए इस ऑपरेशन ने सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति और खुफिया तंत्र की प्रभावशीलता को भी साबित किया है। अब जांच एजेंसियों की नजर उससे मिलने वाली जानकारी पर है, जिससे नक्सली नेटवर्क को और कमजोर करने में मदद मिल सकती है।

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