हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी विशेष किराया नियंत्रण कानून के तहत किरायेदार को बेदखल करने का अधिकार रेंट कंट्रोलर को दिया गया है, तो ऐसे मामलों की सुनवाई वाणिज्यिक अदालत (कामर्शियल कोर्ट) नहीं कर सकती।
अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि लीज पर ली गई संपत्ति का उपयोग पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा है, कामर्शियल कोर्ट को उस विवाद पर अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं हो जाता। इसके साथ ही अदालत ने एक निजी कंपनी की याचिका खारिज कर दी।
कंपनी ने इस कार्रवाई को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि विवादित संपत्ति का उपयोग पूरी तरह व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है और विवादित दावा 43 लाख रुपये से अधिक का है।
इसलिए कामर्शियल कोर्ट एक्ट के तहत केवल कामर्शियल कोर्ट को ही इस मामले की सुनवाई का अधिकार है। कंपनी ने यह भी दलील दी कि वर्तमान में विवादित परिसर पर उसका नहीं, बल्कि उसकी पूर्व फ्रेंचाइजी का कब्जा है। ऐसे में रेंट कंट्रोलर इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते।

