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    झारखंड की राजनीति को बड़ा झटका, पूर्व मंत्री और धनबाद के पूर्व विधायक मन्नान मल्लिक का निधन, शोक में डूबा झारखंड

    AdminBy AdminJuly 14, 2026No Comments5 Mins Read
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    धनबाद। झारखंड की राजनीति और श्रमिक आंदोलन के लिए मंगलवार का दिन बेहद दुखद रहा। झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कोयलांचल की मजदूर राजनीति के प्रमुख चेहरे मन्नान मल्लिक का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने मंगलवार सुबह रांची के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका इलाज जारी था।

    उनके निधन की खबर मिलते ही धनबाद, रांची और पूरे झारखंड के राजनीतिक एवं सामाजिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। कांग्रेस नेताओं, श्रमिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में समर्थकों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मन्नान मल्लिक का जाना झारखंड की राजनीति और श्रमिक आंदोलन के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

    राजनीति और जनसेवा का लंबा सफर

    मन्नान मल्लिक का सार्वजनिक जीवन कई दशकों तक सक्रिय रहा। उन्होंने राजनीति में आने से पहले तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर के निजी सचिव के रूप में कार्य किया। प्रशासनिक अनुभव प्राप्त करने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया।

    अपनी सादगी, कार्यशैली और संगठन क्षमता के कारण वे जल्द ही कांग्रेस के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए। उन्होंने पार्टी को गांव-गांव तक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    2009 में बने धनबाद के विधायक

    मन्नान मल्लिक ने वर्ष 2009 में कांग्रेस के टिकट पर धनबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। विधानसभा में उन्होंने स्थानीय विकास, श्रमिकों की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया।

    उनकी सक्रियता और अनुभव को देखते हुए बाद में उन्हें हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस कोटे से मंत्री बनाया गया। मंत्री रहते हुए उन्होंने विकास योजनाओं और जनकल्याण से जुड़े विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई।

    श्रमिक राजनीति के मजबूत स्तंभ

    मन्नान मल्लिक की सबसे बड़ी पहचान श्रमिक नेता के रूप में रही। वे लंबे समय तक राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ (RCMS) और राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष रहे।

    धनबाद और कोयलांचल क्षेत्र में हजारों कोयला मजदूरों के बीच उनकी मजबूत पकड़ थी। उन्होंने मजदूरों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, कार्यस्थल की सुरक्षा और श्रमिक अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया।

    बीसीसीएल और अन्य कोयला क्षेत्रों में मजदूरों की समस्याओं को सरकार और प्रबंधन तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    कांग्रेस संगठन को दी नई मजबूती

    मन्नान मल्लिक लंबे समय तक धनबाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और कांग्रेस की जमीनी पकड़ बढ़ाने में अहम योगदान दिया।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि वे हमेशा कार्यकर्ताओं की बात सुनते थे और संगठन को परिवार की तरह चलाने में विश्वास रखते थे।

    सादगी और संघर्ष से बनाई अलग पहचान

    राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बावजूद मन्नान मल्लिक अपनी सादगी और सहज व्यवहार के लिए जाने जाते थे। आम लोगों से उनका सीधा संवाद रहता था और वे जनसमस्याओं के समाधान के लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे।

    श्रमिक संगठनों के बीच उनकी छवि एक ऐसे नेता की थी, जो केवल भाषण नहीं देते थे, बल्कि मजदूरों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझते और समाधान के लिए संघर्ष करते थे।

    निधन की खबर से शोक की लहर

    मन्नान मल्लिक के निधन की सूचना मिलते ही झारखंड के राजनीतिक, सामाजिक और श्रमिक संगठनों में शोक की लहर फैल गई।

    बेरमो विधायक जयमंगल सिंह, राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ की कार्यकारी अध्यक्ष अनुपमा सिंह, श्रमिक नेता बृजेंद्र प्रसाद सिंह, इंटक के राष्ट्रीय सचिव वीरेंद्र प्रसाद अंबष्ट, महामंत्री ए.के. झा, लगन देव यादव, सुरेंद्र यादव, मिथिलेश प्रसाद सिंह सहित अनेक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    सभी नेताओं ने उन्हें श्रमिक हितों का मजबूत प्रहरी, संघर्षशील जननेता और सरल व्यक्तित्व का धनी बताया।

    श्रमिक आंदोलन को अपूरणीय क्षति

    श्रमिक संगठनों का कहना है कि मन्नान मल्लिक के निधन से कोयलांचल के श्रमिक आंदोलन को बड़ी क्षति पहुंची है।

    उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में मजदूरों की समस्याओं को प्राथमिकता दी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष किया। उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

    युवा नेताओं के लिए प्रेरणा

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मन्नान मल्लिक का राजनीतिक जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने संगठन, संघर्ष और जनसेवा को राजनीति का आधार बनाया।

    वे हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की बात करते रहे। यही कारण है कि उन्हें राजनीतिक विरोधियों का भी सम्मान प्राप्त था।

    अंतिम विदाई की तैयारी

    परिवार और कांग्रेस नेताओं के अनुसार, मन्नान मल्लिक के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए धनबाद लाया जाएगा, जहां पार्टी कार्यकर्ता, श्रमिक संगठन और आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद पूरे राजकीय सम्मान और पारिवारिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

    निष्कर्ष

    पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मन्नान मल्लिक का निधन झारखंड की राजनीति और श्रमिक आंदोलन के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जनसेवा, संगठन निर्माण और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। धनबाद से लेकर पूरे झारखंड तक उनकी पहचान एक ईमानदार, संघर्षशील और जनहितैषी नेता के रूप में रही। उनके विचार, कार्यशैली और श्रमिक हितों के लिए किया गया संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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