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    Home»Breaking News»बांकीपुर उपचुनाव में दांव बड़ा, बीजेपी के साथ विपक्ष की असली ताकत का भी होगा फैसला
    Breaking News

    बांकीपुर उपचुनाव में दांव बड़ा, बीजेपी के साथ विपक्ष की असली ताकत का भी होगा फैसला

    AdminBy AdminJuly 7, 2026No Comments3 Mins Read
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    पटना: बांकीपुर विधानसभा का उपचुनाव अब एक रोचक जंग में तब्दील हो गया है। अब ये जंग केवल इस बात के लिए नहीं रह गया कि क्या बीजेपी का गढ़ बना रहेगा? ज्यादा मुश्किल जंग तो इस बात को लेकर है कि जनता किसे चुनती है मुख्य विपक्ष? अभी तक तो संभावना ये बन रही थी कि भाजपा का टक्कर एकजुट विपक्ष से संभावित है।

    बीजेपी ने इसलिए अभी तक उम्मीदवार के नाम की घोषणा भी नहीं की है। राजद ने रेखा गुप्ता को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की जंग में उतारकर उस घेराबंदी को ना कह दिया, जहां ये समझ बन रही थी कि बीजेपी के विरुद्ध एक जुट विपक्ष एक ही उम्मीदवार खड़ा करेगा। आखिर राजद ने बीजेपी के गढ़ को ध्वस्त करने के लिए एक विपक्ष की राजनीति को क्यों ना कहा? जानिए इस कदम के पीछे राजद की राजनीति क्या है?

    बिहार में मुख्य विपक्ष की भूमिका की लड़ाई?

    राजद सत्ता प्राप्ति की जंग में मूल विपक्ष का चेहरा बना रहना चाहती है। वजह इसकी साफ है कि जब कभी बीजेपी नीत सरकार से ऊबकर बिहार की जनता सत्ता हस्तांतरण (सरकार बदलने) की सोचें तो उसके सामने एक विकल्प राष्ट्रीय जनता दल हो या फिर राजद नीत गठबंधन। राष्ट्रीय जनता दल इस रिस्क लेने की स्थिति में नहीं है कि जनसुराज एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरकर जनता के सामने एक विकल्प बन कर उभरे। इसलिए राजद ने एकजुट विपक्ष की थ्योरी को ना कहा?

    RJD के लिए MY का विकल्प बने रहने की जंग

    राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बना कर MY समीकरण को विकल्पहीनता की स्थिति में जनसुराज को विकल्प चुनने की स्थिति भी नहीं बनने देना भी राजद की राजनीति की उल्टी गिनती शुरू जैसी हो जाएगी। राजद के अनुपस्थित रहने पर MY समीकरण के सामने बीजेपी के अलावा दूसरा बड़ा विकल्प जनसुराज के उम्मीदवार ही रहेंगे। ऐसी स्थिति में सवर्ण, राजद और जनसुराज के वोटर एक साथ प्रशांत किशोर के पक्ष में वोट करते हैं तो जीत हार के समीकरण में बदलाव आगामी राजनीति के विकल्प के रूप में स्थान बना लेगा।

    बिहार में कांग्रेस की स्थिति दयनीय

    कांग्रेस के भीतर ये जंग पिछले कई चुनाव से चल रहा है कि कैसे कांग्रेस अपने पारंपरिक वोट सवर्ण, दलित और मुस्लिम मत को एक बार फिर से जोड़ सके। इसके लिए कांग्रेस की कोशिश लगातार इस बात की हो रही है कि उसे राजद की ‘बी टीम’ की तोहमत से मुक्ति मिले। ऐसे में कांग्रेस जनसुराज के उम्मीदवार को अपना समर्थन देकर बिहार में एक नए गठबंधन की नींव भी डालना चाहती है जो माइनस बीजेपी और माइनस राजद बन सके। ऐसे में कांग्रेस, वाम दल और जनसुराज के साथ अन्य नाराज दल को एक प्लेटफार्म उपलब्ध करा कर बीजेपी नीत सरकार का विकल्प खड़ा कर बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दे सकती है।

    बिखराव की राजनीति से बीजेपी ‘हैप्पी’

    बांकीपुर उपचुनाव पर सीधी टक्कर की संभावना हटते ही बीजेपी एक मजबूत समीकरण की तरफ बढ़ चली है। होता ये आया है कि वोटों का बिखराव बीजेपी के उम्मीदवार को सूट करता है। बांकीपुर का चुनाव राजद और जनसुराज की मौजूदगी में त्रिकोणातमक संघर्ष की तरफ चल पड़ा। गत बांकीपुर विधानसभा में चुनाव में बीजेपी लगभग 50 हजार से ज्यादा मतों से जीत हासिल की थीं। इस बार भी वोटों के बिखराव के संकेत मिल रहे हैं और ये बीजेपी की मुश्किल आसान करते दिख रहा है।

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