रांची/वाराणसी: प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीपीसी (तृतीय प्रस्तुति कमेटी) के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता की वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई। ब्रजेश गंझू पर झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख रुपये और एनआईए की ओर से 5 लाख रुपये, यानी कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
ब्रजेश गंझू मूल रूप से चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र का रहने वाला था। वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए वांछित था। आधिकारिक रिकॉर्ड में उसका नाम टीपीसी के सुप्रीमो के तौर पर दर्ज रहा है।
कोयला परियोजनाओं में लेवी और टेरर फंडिंग से जुड़ा नाम
ब्रजेश गंझू का नाम चतरा के टंडवा क्षेत्र की कोयला परियोजनाओं से जुड़े मामले में भी सामने आया था। न्यायिक रिकॉर्ड के मुताबिक टीपीसी से जुड़े लोगों पर कोयला कारोबारियों, ठेकेदारों और ट्रांसपोर्टरों से लेवी वसूली के आरोपों की जांच हुई थी। बाद में मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई।
एनआईए से जुड़े मामले में ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता को फरार आरोपियों में शामिल किया गया था। यह मामला टंडवा थाना कांड संख्या 02/2016 से संबंधित था, जिसे बाद में एनआईए ने RC-06/2018 के रूप में जांच के लिए लिया।
पूर्व विधायक गणेश गंझू का भाई था ब्रजेश
ब्रजेश गंझू सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू का भाई था। गणेश गंझू के मुताबिक ब्रजेश की मुठभेड़ में मौत को लेकर कई सवाल हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि ब्रजेश को कहीं और से पकड़कर दूसरे स्थान पर ले जाकर मारा गया और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। हालांकि, यह परिवार की ओर से लगाया गया आरोप है, जबकि पुलिस का दावा मुठभेड़ का है।
लंबे समय से था अंडरग्राउंड
सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के बाद ब्रजेश गंझू पिछले कुछ वर्षों से अंडरग्राउंड बताया जा रहा था। वाराणसी में हुई मुठभेड़ के साथ ही टीपीसी के इस प्रमुख चेहरे का अंत हो गया। अब यूपी एटीएस और स्थानीय पुलिस की ओर से वाराणसी में उसके पहुंचने, नेटवर्क और मुठभेड़ से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।

