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    Home»Breaking News»सुदिव्य कुमार सोनू: जमीनी कार्यकर्ता से झामुमो के रणनीतिकार और कैबिनेट मंत्री तक का सफर
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    सुदिव्य कुमार सोनू: जमीनी कार्यकर्ता से झामुमो के रणनीतिकार और कैबिनेट मंत्री तक का सफर

    AdminBy AdminSeptember 6, 2026Updated:September 6, 2026No Comments6 Mins Read
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    Article by: Kuber Singh

    गिरिडीह। झारखंड की राजनीति में एक लंबी और संघर्षपूर्ण पारी खेलने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कद्दावर नेता सुदिव्य कुमार सोनू अब हमारे बीच नहीं रहे। लोकप्रिय रूप से ‘सुधीर सोनू’ और ‘सोनू भैया’ के नाम से पहचाने जाने वाले सुदिव्य कुमार सोनू का 6 सितंबर 2026 को गिरिडीह स्थित उनके आवास पर हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनके निधन से झामुमो संगठन के साथ-साथ गिरिडीह और पूरे झारखंड के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।

    तीन दशकों से अधिक लंबे राजनीतिक सफर में सुदिव्य कुमार सोनू ने एक सामान्य जमीनी कार्यकर्ता से लेकर लगातार दो बार विधायक और झारखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया। पार्टी संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ और राजनीतिक सूझबूझ के कारण उन्हें झामुमो का एक प्रमुख रणनीतिकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बेहद करीबी एवं भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था।

    गिरिडीह की मिट्टी से शुरू हुआ सफर

    सुदिव्य कुमार सोनू का जन्म 26 जुलाई 1970 को गिरिडीह में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा भी गिरिडीह में ही हुई। छात्र जीवन से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों के प्रति उनका रुझान बढ़ने लगा था।

    साल 1989 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद उनका पूरा राजनीतिक जीवन पार्टी और झारखंड की राजनीति से जुड़ता चला गया।

    दिशोम गुरु शिबू सोरेन से मिला राजनीतिक मार्गदर्शन

    सुदिव्य कुमार सोनू के राजनीतिक जीवन में झामुमो सुप्रीमो और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बताया जाता है कि गुरुजी ने उनके पिता से कहकर सुदिव्य सोनू को अपने पास रखा था। शिबू सोरेन उन्हें बेटे की तरह मानते थे और उनके साथ रहते हुए सुदिव्य सोनू ने राजनीति की बारीकियां और संगठन चलाने के गुर सीखे।

    यही नजदीकी आगे चलकर उनके राजनीतिक व्यक्तित्व की मजबूत नींव बनी।

    झारखंड आंदोलन में सक्रिय भूमिका

    अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर चले आंदोलन के दौर में सुदिव्य कुमार सोनू ने सक्रिय भूमिका निभाई। आंदोलन के दौरान उन्हें राजनीतिक संघर्ष के साथ-साथ मुकदमों का भी सामना करना पड़ा।

    उन्होंने आंदोलन और संगठन के दौर में जमीनी स्तर पर लगातार काम किया। यही वजह रही कि समय के साथ पार्टी के भीतर उनकी पहचान एक समर्पित और भरोसेमंद कार्यकर्ता के रूप में मजबूत होती गई।

    1992 में बने गिरिडीह नगर झामुमो के संस्थापक अध्यक्ष

    संगठन में उनकी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर झामुमो का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया।

    इसके बाद तीन दशकों से अधिक समय तक उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गिरिडीह में झामुमो के संगठनात्मक विस्तार में उनका योगदान विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

    चुनावी राजनीति में कई उतार-चढ़ाव

    सुदिव्य कुमार सोनू का चुनावी सफर भी संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने 2009 और 2014 में गिरिडीह विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों चुनावों में उन्हें सफलता नहीं मिली।

    हालांकि उन्होंने हार के बाद भी राजनीतिक संघर्ष नहीं छोड़ा और संगठन के बीच सक्रिय रहे।

    2019 में मिली पहली बड़ी चुनावी सफलता

    साल 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने गिरिडीह विधानसभा सीट से भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को हराकर पहली बार विधानसभा का चुनाव जीता।

    यह जीत उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई।

    इसके बाद 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने गिरिडीह सीट से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की और विधानसभा में अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत किया।

    हेमंत सरकार में संभाली महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

    2024 में लगातार दूसरी बार विधायक बनने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें अपनी कैबिनेट में शामिल किया। सरकार में उन्हें कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई।

    उनके पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेल एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग रहे।

    मंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत पहलों पर भी काम किया।

    पर्यटन के क्षेत्र में नई पहल

    पर्यटन मंत्री के रूप में सुदिव्य कुमार सोनू ने झारखंड के पर्यटन स्थलों को विकसित करने और राज्य को पर्यटन के नक्शे पर और मजबूत तरीके से स्थापित करने पर जोर दिया।

    इको-टूरिज्म, स्काईवॉक और होमस्टे नीति जैसी पहलों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका रही। उनका जोर झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय संसाधनों को रोजगार और पर्यटन से जोड़ने पर था।

    छात्रों और सरकार के बीच बने संवाद का माध्यम

    JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़े विवादों के दौरान भी सुदिव्य कुमार सोनू की भूमिका चर्चा में रही। उन्होंने छात्रों और सरकार के बीच संवाद स्थापित करने तथा समस्याओं को बातचीत के माध्यम से सुलझाने की कोशिश की।

    इस भूमिका ने उनकी एक ऐसे नेता की छवि को मजबूत किया जो राजनीतिक पद के साथ-साथ लोगों की समस्याओं को सीधे सुनने और संवाद करने में विश्वास रखता था।

    झामुमो के ‘रणनीतिकार’ के रूप में पहचान

    सुदिव्य कुमार सोनू की सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान केवल विधायक या मंत्री के रूप में नहीं थी। पार्टी के भीतर उन्हें संगठन और चुनावी रणनीति को समझने वाले नेताओं में गिना जाता था।

    2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान झामुमो के लिए मजबूत सोशल मीडिया टीम तैयार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। बदलते राजनीतिक दौर में डिजिटल माध्यमों की ताकत को समझते हुए उन्होंने पार्टी के प्रचार तंत्र को आधुनिक बनाने पर काम किया।

    हेमंत सोरेन की अनुपस्थिति में भी निभाई अहम भूमिका

    जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा, उस दौर में झारखंड की राजनीति में कई बड़े बदलाव हुए। इसी दौरान कल्पना सोरेन को सक्रिय राजनीति में स्थापित करने और गांडेय विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने की रणनीति में सुदिव्य कुमार सोनू की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

    यह रणनीति सफल रही और कल्पना सोरेन ने गांडेय से चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में अपनी मजबूत जगह बनाई।

    इस घटनाक्रम ने सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में पहचान को और मजबूत किया।

    ‘सोनू भैया’ के नाम से थे लोकप्रिय

    राजनीतिक पद और सत्ता की जिम्मेदारियों के बावजूद सुदिव्य कुमार सोनू की पहचान अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच एक सहज और जमीनी नेता के रूप में रही। गिरिडीह में उन्हें लोग प्यार से ‘सोनू भैया’ कहकर बुलाते थे।

    कार्यकर्ताओं से उनका सीधा संपर्क और संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उनकी राजनीतिक शैली की खास पहचान रही।

    एक लंबा राजनीतिक सफर अचानक थम गया

    सुदिव्य कुमार सोनू का जीवन झारखंड आंदोलन से लेकर आधुनिक चुनावी राजनीति तक के कई महत्वपूर्ण दौर का साक्षी रहा। एक प्राथमिक सदस्य से शुरू हुआ उनका सफर नगर अध्यक्ष, विधायक और फिर कैबिनेट मंत्री तक पहुंचा।

    6 सितंबर 2026 को उनके आकस्मिक निधन के साथ झारखंड की राजनीति ने एक अनुभवी जमीनी नेता, संगठनकर्ता और रणनीतिकार को खो दिया।

    उनका राजनीतिक जीवन आने वाली पीढ़ी के लिए इस मायने में भी महत्वपूर्ण रहेगा कि उन्होंने लंबी राजनीतिक यात्रा में असफलताओं के बावजूद संघर्ष जारी रखा और अंततः गिरिडीह की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई।

    सुदिव्य कुमार सोनू का निधन झामुमो के लिए ही नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति है।

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