झारखंड में लंबे समय से चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है. शीर्ष स्तर के सैकड़ों नेताओं की गिरफ्तारी, सुरक्षा बलों के साथ हुए मुठभेड़ों में बड़े कैडरों के मारे जाने और बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण से प्रतिबंधित संगठनों की ताकत जमीनी स्तर पर बहुत कमजोर हो गई है. हाल में ही बीते जुलाई में एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को भी इस अभियान की बड़ी सफलता माना गया. हालांकि, पुलिस अभी भी टेंशन में है और झारखंड पुलिस की नजर अब राज्य के अलग-अलग जेलों में बंद एक हजार से ज्यादा नक्सलियों और उग्रवादियों पर है.
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय अब जेलों में बंद ऐसे कैदियों की गतिविधियों और उनके पुराने नेटवर्क पर भी नजर रख रहा है. हाल के अभियानों में बड़ी संख्या में नक्सलियों की गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण के बाद पुलिस का फोकस अब बचे हुए सक्रिय कैडरों के साथ जेल नेटवर्क पर भी है.
जेल में बंद नक्सलियों पर भी पुलिस की नजर
झारखंड पुलिस का मानना है कि संगठन की ताकत कमजोर होने के बावजूद जेल में बंद कुछ कुख्यात नक्सलियों के पुराने संपर्क अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. ऐसे में आशंका है कि जेल के अंदर रहते हुए भी कोई कुख्यात नक्सली अपने पुराने नेटवर्क के जरिए संगठन को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर सकता है. इसी कारण राज्य की जेलों में बंद नक्सलियों की गतिविधियों और उनके संपर्कों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है.

