राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में भारी बारिश के दौरान जलजमाव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। मंत्री ने तत्काल रिम्स के निदेशक और अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए स्पष्ट कहा कि राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में किसी भी प्रकार की लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
भारी बारिश और मरम्मत कार्य के कारण हुआ जलजमाव
रिम्स के निदेशक डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा ने स्वास्थ्य मंत्री को जानकारी दी कि लगातार हो रही भारी बारिश के दौरान मरम्मत कार्य चल रहा था, जिसके कारण संबंधित स्थल पर कुछ समय के लिए जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हुई। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित संवेदक ने कार्य स्वयं कराने के बजाय पेटी कॉन्ट्रैक्ट (सब-कॉन्ट्रैक्ट) के माध्यम से कराया, जिससे कार्य की गुणवत्ता और निगरानी प्रभावित हुई।
पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर स्वास्थ्य मंत्री की नाराजगी
इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकारी परियोजनाओं में पेटी कॉन्ट्रैक्ट की संस्कृति किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संवेदक के डी-रजिस्ट्रेशन का निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री ने भवन निर्माण विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि संबंधित संवेदक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू की जाए और उसके डी-रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण निरस्तीकरण) की प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाए। उन्होंने कहा कि जो संवेदक अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी और गुणवत्ता के साथ निर्वहन नहीं कर सकते, उन्हें सरकारी कार्य करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
रिम्स प्रशासन को नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश
डॉ. अंसारी ने रिम्स प्रशासन को निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता में कमी, निगरानी में लापरवाही या कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियां पूरी जवाबदेही के साथ निभानी होंगी।
आधे घंटे में सामान्य हुई स्थिति
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जलजमाव की सूचना मिलते ही प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए करीब आधे घंटे के भीतर परिसर से पानी की निकासी कर स्थिति सामान्य कर दी। इस दौरान अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रहीं और किसी भी मरीज के इलाज पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा।

