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    Home»Breaking News»धनबाद-बोकारो की लाइफलाइन बिरसा पुल पर संकट, विभागीय लापरवाही से बढ़ा हादसे का डर
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    धनबाद-बोकारो की लाइफलाइन बिरसा पुल पर संकट, विभागीय लापरवाही से बढ़ा हादसे का डर

    AdminBy AdminJuly 27, 2026No Comments4 Mins Read
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    धनबाद। झारखंड के धनबाद और बोकारो को जोड़ने वाला बिरसा पुल इन दिनों अपनी जर्जर स्थिति को लेकर चर्चा में है। झरिया के मोहलबनी स्थित दामोदर नदी घाट पर बना यह महत्वपूर्ण पुल अब स्थानीय लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है। पुल के बोकारो के अमलाबाद की ओर स्थित एक पिलर का बेस पिछले पांच से छह महीनों से दो हिस्सों में टूट चुका है, लेकिन अब तक संबंधित विभाग की ओर से इसकी मरम्मत या सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में स्थानीय लोगों को किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका सताने लगी है।

    टूटे पिलर से खतरे के साये में पुल

    स्थानीय लोगों के अनुसार पुल के पिलर के बेस में आई दरार और टूट-फूट लगातार बढ़ रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पुल से भारी वाहन गुजरने के दौरान कंपन साफ महसूस होता है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो यह पुल कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

    बिरसा पुल धनबाद के झरिया और बोकारो जिले के चंदनकियारी क्षेत्र के बीच प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन हजारों लोग इसी पुल के जरिए आवाजाही करते हैं।

    करोड़ों की मरम्मत के बाद भी फिर खराब हुआ पुल

    गौरतलब है कि वर्ष 2024 में लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से बिरसा पुल की मरम्मत कराई गई थी। मरम्मत कार्य के दौरान करीब तीन महीने तक पुल पर यातायात पूरी तरह बंद रखा गया था। इसके बाद 12 सितंबर 2024 को पुल को दोबारा आम लोगों के लिए खोल दिया गया।

    हालांकि, मरम्मत के महज एक वर्ष के भीतर ही पुल की हालत फिर से खराब होने लगी है। इससे मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और उपयोग की गई सामग्री पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल की मरम्मत के दौरान घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया था। उस समय भी लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे और विरोध दर्ज कराया था।

    ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग और अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। आज उसी लापरवाही का परिणाम पुल की खराब स्थिति के रूप में सामने आ रहा है।

    सुरक्षा इंतजाम भी बदहाल

    पुल की स्थिति केवल पिलर तक ही सीमित नहीं है। अमलाबाद की ओर पुल के किनारे लगा लोहे का सुरक्षा गार्ड भी टूट चुका है, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ गया है।

    यदि किसी वाहन का संतुलन बिगड़ जाए तो गंभीर हादसा हो सकता है। स्थानीय लोग पुल पर तत्काल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।

    कई जिलों को जोड़ता है बिरसा पुल

    1980 के दशक में तत्कालीन एकीकृत बिहार सरकार द्वारा निर्मित बिरसा पुल झारखंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है।

    यह पुल—

    • धनबाद
    • बोकारो
    • रांची
    • जमशेदपुर

    के अलावा पश्चिम बंगाल के कई इलाकों को जोड़ता है।

    इसके अलावा ओडिशा और दक्षिण भारत की ओर जाने वाले हजारों छोटे, बड़े और व्यावसायिक वाहन भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।

    समय और ईंधन दोनों की होती है बचत

    यह मार्ग अन्य विकल्पों की तुलना में कम दूरी का होने के कारण वाहन चालकों के लिए काफी सुविधाजनक माना जाता है। इससे यात्रा का समय कम लगता है और ईंधन की भी बचत होती है। यही वजह है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री वाहन, ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहन इस पुल से गुजरते हैं।

    लोगों ने की तत्काल कार्रवाई की मांग

    स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से पुल का तकनीकी निरीक्षण कराने तथा क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई की जानी चाहिए।

    विभागीय चुप्पी पर सवाल

    पुल की गंभीर स्थिति सामने आने के बावजूद अब तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान या मरम्मत की समयसीमा जारी नहीं की गई है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।

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