सीबीआइ ने दूसरी सिविल सेवा परीक्षा की कॉपियों की जांच कर जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें साफ है कि किस प्रकार ओएमआर शीट में गड़बड़ी की गयी. सीबीआइ ने बताया है कि शीट में जिन लोगों ने कम गोले भरे, उन्हें भी भरपूर अंक दिया गया. गोपला सिंह जो जेपीएससी के तत्कालीन सदस्य थे, उनके बेटे कुंदन कुमार सिंह ने ओएमआर में सिर्फ 19 गोले भरे थे, लेकिन रिजल्ट में उन्हें 88 अंक दे दिये गये. अंत में वह चयनित भी हुए. ऐसा ही कई कॉपियों में पाया गया. ऐसे में यह तय है कि जिन्हें नौकरी मिल गयी है, वह भी अब बचेगी या नहीं यह सवालों के घेरे में है.
सीआइडी की जांच के बाद अब अधिकांश भर्तियां सीबीआइ या सीआइडी की जांच की जद में आ गयी हैं. जेपीएससी चेयरमैन इस्तीफा दे चुके हैं पर जांच चल रही है, परीक्षा नियंत्रक को गड़बड़ी के आरोप में जेल भेजा जा चुका है. जेपीएससी दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा विवाद की जांच अब भी चल रही है.
सीबीआइ ने जांच कर एक रिपोर्ट सौंपी है, दूसरी आनी बाकी है. रिपोर्ट में स्पष्ट गड़बड़ियां सामने आयी हैं. पर जांच अभी चल रही है, इसलिए चयनित बीडीओ, सीओ, डीएसपी, कमांडेट, वाणिज्यकर अधिकारी जैसे पदों पर आराम से काम कर रहे हैं.
अब जांच में गड़बड़ियां उजागर हो रही हैं. एक तथ्य यह भी है कि सीबीआइ ने नेताओं से जुड़े अभ्यर्थियों के नाम तो उजागर किये, जेपीएससी में कार्यरत लोगों के रिश्तेदारों को भी ढूंढ़ लिया, लेकिन किन बड़े अफसरों की पैरवी पर किन लोगों की नियुक्तियां हुई, इसकी कभी जांच ही नहीं हुई.
सीबीआइ ने जांच कर बताया है कि प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में स्पष्ट अनियमितताएं मिली हैं. परीक्षा की कॉपियों में जो गड़बड़ी की वह अपनी जगह हैं, सबसे बड़ी बात नियमों का उल्लंघन कर तय संख्या से अधिक संख्या में उम्मीदवारों को सफल घोषित कर दिया गया. जेपीएससी की दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (2004) में 172 पदों के लिए परीक्षा हुई. प्रारंभिक परीक्षा में नियमानुसार 1,720 अभ्यर्थी सफल होने चाहिए थे, लेकिन आयोग ने 16,314 को सफल घोषित कर दिया. मुख्य परीक्षा में भी नियमानुसार अधिकतम 516 सफल होने चाहिए थे, पर 804 घोषित किये गये.

