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    Home»Breaking News»बिहार के वाहन चालकों के लिए बड़ी खबर! अब स्टेट हाईवे और लंबे पुलों पर देना होगा टोल, भुगतान नहीं किया तो लगेगा दोगुना जुर्माना
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    बिहार के वाहन चालकों के लिए बड़ी खबर! अब स्टेट हाईवे और लंबे पुलों पर देना होगा टोल, भुगतान नहीं किया तो लगेगा दोगुना जुर्माना

    AdminBy AdminJuly 10, 2026No Comments5 Mins Read
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    पटना। बिहार सरकार ने राज्य में सड़क अवसंरचना को मजबूत बनाने और टोल वसूली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से नई टोल नीति लागू कर दी है। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद पथ निर्माण विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब व्यावसायिक वाहनों को राज्य के स्टेट हाईवे और 250 मीटर से अधिक लंबे पुलों पर टोल टैक्स देना होगा। यदि कोई वाहन चालक टोल देने से बचता है या बिना भुगतान किए निकल जाता है, तो उसे दोगुना जुर्माना देना पड़ेगा।

    नई नीति में टोल वसूली, ऑनलाइन नोटिस, आपत्ति दर्ज कराने और बकाया वसूली की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी असमंजस की स्थिति न बने।

    राज्य में लागू हुई नई टोल व्यवस्था

    पथ निर्माण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नई टोल नीति का उद्देश्य राज्य के सड़क नेटवर्क के रखरखाव और विकास के लिए संसाधन जुटाना है। इसके तहत व्यावसायिक वाहनों से निर्धारित टोल शुल्क वसूला जाएगा।

    यह नियम विशेष रूप से राज्य राजमार्गों (स्टेट हाईवे) और 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले पुलों पर लागू होगा। सरकार का कहना है कि इससे सड़क परियोजनाओं के रखरखाव और नई परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे।

    टोल नहीं देने पर क्या होगा?

    नई नीति के तहत यदि कोई वाहन चालक टोल प्लाजा पर निर्धारित शुल्क का भुगतान किए बिना आगे निकल जाता है या जानबूझकर भुगतान से इनकार करता है, तो उस पर सामान्य टोल राशि के अलावा दोगुना जुर्माना लगाया जाएगा।

    सरकार ने इसे टोल चोरी रोकने और नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के लिए लागू किया है।

    वाहन मालिक को मिलेगा ई-नोटिस

    यदि कोई वाहन बिना टोल भुगतान किए निकल जाता है, तो विभाग संबंधित वाहन के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ई-नोटिस भेजेगा।

    इस नोटिस में बकाया टोल राशि और आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।

    यदि वाहन मालिक 72 घंटे के भीतर टोल राशि जमा कर देता है, तो उसे अतिरिक्त जुर्माना नहीं देना होगा।

    यानी समय पर भुगतान करने पर केवल मूल टोल राशि ही देनी होगी।

    15 दिन तक भुगतान नहीं किया तो होगी सख्त कार्रवाई

    यदि वाहन मालिक 15 दिनों तक भी टोल और बकाया राशि का भुगतान नहीं करता है, तो विभाग को संबंधित वाहन के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार होगा।

    अधिसूचना के अनुसार, ऐसे वाहन को राज्य में कहीं भी रोककर बकाया राशि और जुर्माना वसूला जा सकता है।

    यह व्यवस्था टोल चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से बनाई गई है।

    वाहन के दस्तावेजों पर भी पड़ेगा असर

    नई नीति के सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक यह है कि यदि बकाया राशि की वसूली नहीं हो पाती है, तो संबंधित वाहन के कई प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

    ऐसी स्थिति में वाहन के—

    • इंश्योरेंस से जुड़ी प्रक्रिया,
    • प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC),
    • एनओसी (No Objection Certificate),
    • वाहन ट्रांसफर,
    • अन्य दस्तावेजों के नवीनीकरण

    जैसी सेवाओं को रोका जा सकता है।

    इसका उद्देश्य वाहन मालिकों को समय पर टोल भुगतान के लिए प्रेरित करना है।

    वाहन ऐप से जुड़ेगा टोल सिस्टम

    नई नीति के तहत टोल कलेक्शन सिस्टम को वाहन (VAHAN) पोर्टल से जोड़ा जाएगा।

    इससे बकाया टोल वाले वाहनों की पहचान करना आसान होगा और विभाग को कार्रवाई में सुविधा मिलेगी।

    डिजिटल एकीकरण के माध्यम से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज बनने की उम्मीद है।

    गलत नोटिस मिलने पर क्या करें?

    सरकार ने वाहन मालिकों को राहत देते हुए आपत्ति दर्ज कराने की भी सुविधा दी है।

    यदि किसी वाहन स्वामी को लगता है कि उसे गलत तरीके से ई-नोटिस भेजा गया है, तो वह 72 घंटे के भीतर बिहार सरकार के निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है।

    पांच दिन में होगा फैसला

    ऑनलाइन आपत्ति मिलने के बाद संबंधित अधिकारी को पांच दिनों के भीतर उसकी जांच कर निर्णय देना होगा।

    जांच पूरी होने के बाद वाहन मालिक को ईमेल और एसएमएस के माध्यम से निर्णय की जानकारी दी जाएगी।

    यदि निर्धारित पांच दिनों के भीतर कोई निर्णय नहीं लिया जाता, तो संबंधित बकाया राशि स्वतः समाप्त मानी जाएगी और इसकी जानकारी वाहन पोर्टल पर भी अपडेट कर दी जाएगी।

    यह प्रावधान नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जोड़ा गया है।

    किन वाहनों पर लागू होगा नियम?

    फिलहाल नई नीति मुख्य रूप से व्यावसायिक वाहनों पर लागू की गई है।

    हालांकि, भविष्य में सरकार आवश्यकता के अनुसार इसमें संशोधन या विस्तार कर सकती है।

    टोल की दरें सड़क और पुल के प्रकार के अनुसार निर्धारित की जाएंगी।

    सरकार को क्या होगा लाभ?

    विशेषज्ञों का मानना है कि नई टोल नीति से राज्य सरकार को सड़कों के रखरखाव और विकास के लिए अतिरिक्त राजस्व मिलेगा।

    इससे—

    • सड़कों की गुणवत्ता में सुधार,
    • पुलों का बेहतर रखरखाव,
    • नई सड़क परियोजनाओं को वित्तीय सहायता,
    • डिजिटल टोल व्यवस्था को बढ़ावा

    मिलने की संभावना है।

    वाहन मालिकों के लिए क्या जरूरी है?

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन मालिकों को अपने मोबाइल नंबर और वाहन संबंधी रिकॉर्ड को अद्यतन रखना होगा।

    साथ ही टोल भुगतान के बाद रसीद सुरक्षित रखना भी उपयोगी होगा, ताकि किसी विवाद की स्थिति में उसे प्रस्तुत किया जा सके।

    यदि ई-नोटिस प्राप्त होता है तो समय-सीमा के भीतर उसका जवाब देना या भुगतान करना आवश्यक होगा।

    निष्कर्ष

    बिहार सरकार की नई टोल नीति राज्य में टोल वसूली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। नई व्यवस्था के तहत स्टेट हाईवे और 250 मीटर से अधिक लंबे पुलों पर व्यावसायिक वाहनों से टोल वसूला जाएगा। वहीं, टोल चोरी रोकने के लिए दोगुना जुर्माना, ई-नोटिस, वाहन पोर्टल से एकीकरण और दस्तावेजों पर रोक जैसे सख्त प्रावधान भी किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे सड़क अवसंरचना के विकास को गति मिलेगी और टोल संग्रह प्रणाली अधिक प्रभावी बन सकेगी।

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