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    Home»Breaking News»हजारीबाग के मेगालिथ को मिलेगी नई पहचान, सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी
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    हजारीबाग के मेगालिथ को मिलेगी नई पहचान, सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी

    AdminBy AdminMay 7, 2026No Comments3 Mins Read
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    हजारीबाग: Hazaribagh जिले के बड़कागांव स्थित प्राचीन मेगालिथ स्थल को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। लगभग 3000 से 5000 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक स्थल को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। झारखंड सरकार इसे इंग्लैंड के प्रसिद्ध न्यूग्रेंज और हेरेंज की तर्ज पर विकसित करना चाहती है, ताकि इसे भविष्य में वर्ल्ड हेरिटेज श्रेणी में शामिल कराया जा सके।

    राज्य के कला एवं पर्यटन विभाग के सचिव मुकेश कुमार ने हाल ही में बड़कागांव प्रखंड के पंकरी बरवाडीह स्थित मेगालिथ क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन की टीम भी मौजूद रही। अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण कर इसके संरक्षण और विकास को लेकर आवश्यक निर्देश दिए।

    हजारों साल पुरानी खगोलीय विरासत

    विशेषज्ञों के अनुसार, पंकरी बरवाडीह का मेगालिथ आदिवासी समुदाय की प्राचीन खगोलीय समझ और वैज्ञानिक गणना का अद्भुत उदाहरण है। यह एक अनोखी प्रागैतिहासिक वेधशाला मानी जाती है, जहां हर वर्ष 21 मार्च और 23 सितंबर को सूर्य की किरणें पत्थरों के बीच से बिल्कुल सीधी गुजरती हैं। इस खगोलीय घटना को इक्विनॉक्स (विषुव) कहा जाता है।

    यह दृश्य “वी” आकार में खड़े दो विशाल पत्थरों के बीच से दिखाई देता है, जिसे देखने के लिए विशेष रूप से लोग यहां पहुंचते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आदिवासी समाज की सटीक खगोलीय गणना और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है।

    इंग्लैंड के न्यूग्रेंज और हेरेंज जैसी होगी पहचान

    सरकार की योजना है कि इस स्थल को इंग्लैंड के प्रसिद्ध Newgrange और Stonehenge जैसे विश्वप्रसिद्ध प्राचीन स्थलों की तर्ज पर विकसित किया जाए। दुनिया भर में इन स्थलों पर इक्विनॉक्स के दौरान सूर्योदय देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।

    अधिकारियों का मानना है कि पंकरी बरवाडीह का मेगालिथ भारत का इकलौता ऐसा ऐतिहासिक इक्विनॉक्स स्थल है, जिसे वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया जा सकता है।

    वर्ष 2000 में हुई थी खोज

    इस ऐतिहासिक स्थल की खोज वर्ष 2000 में मेगालिथ शोधकर्ता और खोजकर्ता शुभाशीष दास ने की थी। उन्होंने इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को दुनिया के सामने लाने का प्रयास किया। अब सरकार की पहल से इसे नई पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

    पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

    यदि इस क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाता है तो हजारीबाग की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी। साथ ही पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। होटल, गाइड, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना है।

    संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस

    सरकार का कहना है कि विकास कार्यों के दौरान इस ऐतिहासिक स्थल की मौलिकता और सांस्कृतिक महत्व को सुरक्षित रखा जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम भी बनाई जा सकती है।

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