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    Home»Breaking News»IPAC के ठिकानों पर ED की रेड, कोयला तस्करी मामले में जांच एजेंसी का एक्शन
    Breaking News

    IPAC के ठिकानों पर ED की रेड, कोयला तस्करी मामले में जांच एजेंसी का एक्शन

    AdminBy AdminApril 2, 2026No Comments5 Mins Read
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    प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने IPAC के ठिकानों पर रेड की है. ये छापेमारी पश्चिम बंगाल कोयला तस्करी मामले में हुई है. रेड हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली में हो रही है. बेंगलुरु में ऋषिराज सिंह के ठिकानों पर छापेमारी हुई है. बता दें कि ऋषिराज सिंह कंपनी के को-फाउंडर हैं.

    I PAC पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है. जांच एजेंसी ने इसी साल जनवरी में भी कोलकाता में IPAC के ठिकानों पर रेड की थी. रेड पर कंपनी ने बयान में कहा था कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने कोलकाता में IPAC के दफ़्तर और हमारे डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर तलाशी ली. IPAC जैसे एक पेशेवर संगठन के लिए यह एक मुश्किल और दुर्भाग्यपूर्ण दिन था.

    क्या है कोयला घोटाला जिसके चलते IPAC के दफ्तर पर ED ने की रेड?

    प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वर्ष 2020 में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर अवैध कोयला खनन मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत जांच शुरू की. जांच में सामने आया कि ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज़ क्षेत्र से अवैध तरीके से कोयले की खुदाई और चोरी की जा रही थी. यह सब आपराधिक तत्वों द्वारा ECL, CISF, भारतीय रेलवे और अन्य संबंधित विभागों के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया.

    ED की जांच में यह भी सामने आया कि अनुप माजी इस पूरे सिंडिकेट का मास्टर माइंड था, जो ECL क्षेत्र में अवैध कोयला खनन और चोरी किए गए कोयले के परिवहन का काम कर रहा था. अनुप माजी सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से ECL के लीज़ क्षेत्र से कोयले की हेराफेरी कर रहा था.

    जांच में यह भी पाया गया कि अनुप माजी के खिलाफ वर्ष 2000 से 2015 के बीच अवैध कोयला खुदाई और चोरी से जुड़े 16 मामले (एफआईआर) दर्ज हुए थे, जिनमें चार्जशीट भी दाखिल की गई थी. इसके बावजूद, उसके प्रभाव और संरक्षण के चलते स्थानीय पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. हालांकि, वर्ष 2020 में CBI ने कोयला चोरी और तस्करी के मामले में एक नया केस दर्ज किया, जिसके बाद जांच को आगे बढ़ाया गया.

    ED की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि अनुप माजी ने अलग-अलग कंपनियों को भेजे गए चोरी के कोयले का हिसाब रखने के लिए कर्मचारियों को तैनात कर रखा था. जांच के दौरान सामने आया कि ECL के लीज़ क्षेत्र से अवैध खनन और चोरी के जरिए करीब ₹2,742.32 करोड़ (टैक्स और रॉयल्टी सहित) के कोयले की हेराफेरी की गई.

    इसके अलावा, ED ने जनवरी से अप्रैल 2021 के बीच PMLA की धारा 17 के तहत 46 ठिकानों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की. इन छापों के दौरान यह सामने आया कि अनुप माजी का अकाउंटेंट अवैध कोयला खनन से अर्जित अपराध की कमाई का पूरा रिकॉर्ड रखता था. ED ने यह भी बताया कि गुरुपदा माजी ने वर्ष 2017 से 2020 के दौरान अनुप माजी के सहयोगियों के माध्यम से ₹89.11 करोड़ की अपराध से अर्जित राशि (POC) पहुंचाई, जबकि जयदेव मंडल ने इसी अवधि में ₹58.05 करोड़ की POC पहुंचाई.

    ईडी की जांच में यह भी पता चला कि इस अवैध कोयले का बड़ा हिस्सा शकंभरी ग्रुप ऑफ कंपनियों को बेचा गया. इसके साथ ही मामले में हवाला नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग भी मिले हैं. कई लोगों के बयानों और अन्य सबूतों से हवाला लेन-देन की पुष्टि हुई है. जांच में यह सामने आया कि कोयला तस्करी से हासिल काले धन को सफेद करने के लिए एक हवाला ऑपरेटर के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन किए गए, जिनका संबंध इंडियन पैक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (I-PAC) से बताया जा रहा है. I-PAC भी उन संस्थाओं में शामिल है, जिनका नाम हवाला मनी से जुड़कर सामने आया है.

    रेड पर कंपनी ने क्या कहा था?

    कंपनी ने कहा कि हमारा मानना ​​है कि इससे गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं और एक परेशान करने वाली मिसाल कायम होती है. इसके बावजूद, हमने पूरा सहयोग दिया है और ज़रूरत पड़ने पर आगे भी ऐसा करते रहेंगे. हम कानून का पूरी तरह से पालन और सम्मान करते हुए इस प्रक्रिया में शामिल रहेंगे.

    IPAC ने अलग-अलग विचारधाराओं और क्षेत्रों की कई राजनीतिक पार्टियों के साथ पेशेवर सलाहकार के तौर पर काम किया है, जिनमें भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, YSR कांग्रेस पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति (अब BRS), जनता दल (यूनाइटेड), शिवसेना और अन्य पार्टियां शामिल हैं.

    ED ने क्या कहा था?

    तब ईडी की रेड पर काफी सियासी बवाल हुआ था. ED ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छापेमारी के दौरान दखल दिया, पुलिस की मदद से डिजिटल डिवाइस और अहम दस्तावेज़ हटा दिए और अधिकारियों को बिना कुछ ज़ब्त किए ही तलाशी रोकने के लिए मजबूर किया.

    एजेंसी ने यह भी दावा किया कि कथित कोयला चोरी से मिले लगभग 20 करोड़ रुपये के हवाला फंड IPAC को भेजे गए थे और उसने अदालत से सुरक्षा की मांग की है, जिसमें ज़ब्त किए गए डेटा के साथ छेड़छाड़ से बचाव और उसके अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR से राहत शामिल है.

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