आज से दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो रही, जिसमें आज दुनिया दिल्ली में एक नया वर्ल्ड ऑर्डर देख सकती है। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के मंच पर एक साथ पीएम मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिखेंगे। भारत मंडपम में दुनिया की आधी आबादी के नेता क्लोज्ड डोर सेशन करेंगे। वहीं देर शाम पीएम मोदी की मेजबानी में आज डिनर का आयोजन हो
इससे पहले आज एशिया की दो महाशक्तियों के बीच मुलाकात होगी। ब्रिक्स समिट में पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होने वाली है। करीब 7 साल बाद भारत के दौरे पर आ रहे शी जिनपिंग का ये दौरा काफी अहम है। एक तरफ ब्रिक्स समिट, तो दूसरी तरफ भारत के साथ रिश्तों में सुधार की उम्मीद है। पीएम मोदी और जिनपिंग का मकसद दोनों देशों के बीच तनाव को कम करना है। इसके अलावा भारत-चीन में विश्वास बहाली करके भविष्य की दिशा तय करना है। साथ ही दोनों नेता ट्रेड डेफिसिट को कम करने के उपायों पर भी चर्चा कर सकते हैं।
आज से ब्रिक्स समिट की शुरुआत
भारत की अध्यक्षता में इस साल भारत के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्च-स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसका मकसद तीन मुख्य स्तंभों (राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, और सांस्कृतिक और लोगों) पर ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना था। इन बैठकों और बिजनेस-टू-बिजनेस तथा लोगों के बीच की पहलों के जरिए भारत की अध्यक्षता ने व्यावहारिक और विकास-उन्मुख परिणामों के माध्यम से ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाया है।
क्यों अहम है ये समिट
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में तीन बार इसकी अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। साल 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है, क्योंकि ब्रिक्स को बने हुए बीस साल पूरे हो रहे हैं। भारत की अध्यक्षता के लिए ब्रिक्स लोगो परंपरा और आधुनिकता का संगम है। इसकी पंखुड़ियों में ब्रिक्स सदस्य देशों के जीवंत रंग झलकते हैं, जो उनकी सामूहिक शक्ति और एकता को दर्शाते हैं। बीच में ‘नमस्ते’ की मुद्रा भारत की गर्मजोशी, सम्मान और सामंजस्यपूर्ण सहयोग की भावना को दर्शाती है।
ये देश ले रहे हिस्सा
ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ब्रिक्स के साझेदार देशों में बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम के नाम शामिल हैं।
ट्रेड से डिफेंस तक इन मुद्दों पर चर्चा
ब्रिक्स का सहयोग आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक आर्थिक स्थिति, दूरसंचार, कृषि, श्रम और रोजगार, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचा, व्यापार और विश्व व्यापार संगठन सहित कई वैश्विक मुद्दों पर लगातार बढ़ रहा है। पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने अपनी सदस्यता का लगातार विस्तार किया है और सहयोग के क्षेत्रों को भी व्यापक बनाया है। इससे ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग और विकास के नए अवसर खुले हैं।
बीते 5 साल में बढ़ा ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार
ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार पिछले 5 वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। एसोचैम ग्लोबल रिसर्च एंड स्ट्रेटेजी सेंटर की रिपोर्ट “द राइज ऑफ ब्रिक्स नेशंस: एन अपॉर्च्युनिटी टू स्केल इंडियन एक्सपोर्ट्स टू 200 बिलियन डॉलर टू ब्रिक्स बाय 2030” के अनुसार, भारत का ब्रिक्स देशों के साथ कुल व्यापार 2020-21 के 203 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 417 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो यह दर्शाती है कि ब्रिक्स समूह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और व्यापारिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।
एसोचैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स सदस्य देशों को भारत का निर्यात 96 अरब डॉलर रहा। एसोचैम का अनुमान है कि अगर भारत दक्षिण-दक्षिण सहयोग को और मजबूत करता है तथा पारंपरिक निर्यात बाजारों से आगे बढ़कर नए अवसरों का लाभ उठाता है, तो वर्ष 2030 तक ब्रिक्स देशों को उसका निर्यात 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

