असम विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Elections) में एक बार फिर हिमंत बिस्वा सरमा का जादू चलता दिख रहा है. इस राज्य में एक बार फिर कमल खिलता दिख रहा है. असम विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) असम में तीसरी बार सरकार बनाती दिख रही है. उधर, असम की सत्ता पर काबिज होने के फिराक में जुटी कांग्रेस (Congress) को बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस सत्ता से काफी दूर दिख रही है.
आपको मालूम हो कि असम विधानसभा की कुल 126 सीटों पर 9 अप्रैल 2026 को चुनाव संपन्न हुआ था. यहां पर सरकार बनाने के लिए 64 सीटें पर जीत जरूरी हैं. विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी ने 90 सीटों पर उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है और कांग्रेस ने 99 सीटों पर चुनावी मैदान में है. भाजपा के गठबंधन दल एनडीए में शामिल एजीपी ने 26 सीटों पर उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है. इस बार बीजेपी ने जहां AGP व UPPL के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है तो कांग्रेस ने AIUDF सहित कई दलों के साथ तालमेल बैठाया है.
पिछले चुनाव में कितनी सीटों पर मिली थी बीजेपी और कांग्रेस को जीत
बीजेपी ने विधानसभा चुनाव 2021 में कुल 93 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 60 सीटों पर जीत दर्ज की थी. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने कुल 126 सीटों में से 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी. विधानसभा चुनाव 2016 में 60 सीटों पर जीत हासिल कर असम में बीजेपी पहली बार सत्ता पर काबिज हुई थी. उधर, असम में कांग्रेस ने पिछली विधानसभा में 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था और सिर्फ 29 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी. कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाजोट गठबंधन ने 50 सीटों पर जीत दर्ज की थी.
कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे हिमंता बिस्वा सरमा
हिमंता बिस्वा सरमा 1990 के दशक से राजनीति में सक्रिय हैं. हिमंता बिस्वा सरमा साल 1991 में कांग्रेस से जुड़े थे लेकिन उन्होंने इस पार्टी का साथ साल 2015 में छोड़ दिया था. इसके बाद बीजेपी का दामन थाम लिया था. बीजेपी ने हिमंता बिस्वा सरमा पर भरोसा जताया और साल 2016 के चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया. एनडीए इस चुनाव में बहुमत पाने में सफल हुई और पहली बार असम में बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनी. बीजेपी की ओर से सर्बानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री बनाया गया. असम विधानसभा चुनाव 2021 में एक बार फिर बीजेपी बंपर जीत दर्ज करने में सफल रही.
इस चुनाव को भाजपा ने हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई में लड़ा था. हिमंता बिस्वा सरमा ने 10 मई 2021 को सीएम पद की शपथ ली थी. इस बार फिर से बीजेपी की कमान हिमंत बिस्वा सरमा के हाथों में थी. हिमंत ने इस बार भी अपनी पार्टी को निराश नहीं किया. नतीजा फिर से भारतीय जनता पार्टी की जीत सुनिश्चित लग रही है. असम में भारतीय जनता पार्टी की यह जीत न सिर्फ सत्ता की वापसी है, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत में भाजपा के राजनीतिक और वैचारिक दबदबे की मजबूत पुष्टि है. यह जनादेश तय करता है कि हिमंत बिस्वा सरमा पूर्वोत्तर में भाजपा के सबसे बड़े और निर्विवाद नेता के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर चुके हैं.
इस चुनाव में इन ज्वलंत मुद्दे से बीजेपी को मिला फायदा
असम विधानसभा चुनाव 2026 में 85.96% मतदान दर्ज किया गया. इस बार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी), नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दे हावी रहे. साल 2023 में लागू किए गए परिसीमन ने भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया है. इसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़ी पार्टियों को मिलता दिख रहा है.
इस चुनाव में असम की जनता ने बीजेपी के संकल्प पत्र पर अपना स्पष्ट जनादेश दिया है. भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता में वापसी के 3 महीने के अंदर यूसीसी लागू करने, घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट करने और जमीन जिहाद पर रोक लगाकर अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराने का वादा किया है. ओरुनोदोई योजना के तहत जरूरतमंद परिवारों को 3000 रुपए प्रति माह की सहायता और 40 लाख महिलाओं को 25 हजार रुपए की एकमुश्त आर्थिक मदद जैसे कल्याणकारी कदमों ने महिला मतदाताओं को बीजेपी के पक्ष में लामबंद किया है.
कांग्रेस से कहां हो गई चूक
असम में कांग्रेस कमाल कर पाने में फिर नाकाम साबित होती दिख रही है. बात वोट शेयर की हो, सीटों की या मुख्यमंत्री चेहरे की, बीजेपी हर मोर्चे पर कांग्रेस से बीस साबित रही. असम में हिमंता बिस्वा सरमा के कद के सामने कांग्रेस का कोई एक सर्वमान्य चेहरा नहीं होने से बीजेपी को लाभ मिला है. कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने प्रभाव छोड़ा, लेकिन वे पूरे असम को एक सूत्र में बांध नहीं सके. चुनाव के दौरान कांग्रेस की ओर से सीएम सरमा की पत्नी पर दुबई में संपत्ति और कई पासपोर्ट होने के आरोप लगाए गए थे.
हालांकि, सरमा ने इसे सिरे से खारिज करते हुए एक ‘पाकिस्तानी सोशल मीडिया समूह’ द्वारा रचे गए एआई और फोटोशॉप आधारित फर्जी दस्तावेजों की विदेशी साजिश करार दिया. इस प्रकरण में पुलिस एफआईआर दर्ज होने और सरमा के आक्रामक पलटवार से कांग्रेस का यह हमला बेअसर हो गया और अंततः चुनावी रुझानों में इसका सीधा सहानुभूति लाभ भाजपा और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को ही मिला. कांग्रेस और उसके सहयोगियों के बीच टिकट बंटवारे को लेकर जो खींचतान हुई, उसका संदेश असम की जनता के बीच अच्छा नहीं गया. उधर, बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ का ग्राफ गिरना विपक्ष के लिए घातक साबित हो रहा है, क्योंकि इसका सीधा फायदा बीजेपी को वोटों के ध्रुवीकरण के रूप में मिलता दिख रहा है.
हिमंत बिस्वा सरमा कैसे बने बीजेपी के जीत के नायक
असम में बीजेपी की हैट्रिक पीछे सबसे बड़ा हाथ सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का हाथ रहा है. हिमंत बिस्वा सरमा को पूर्वोत्तर भारत में भारतीय जनता पार्टी का सबसे बड़ा संकटमोचक और रणनीतिकार माना जाता है. हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी सरकार की छवि एक डिलीवरी-फर्स्ट सरकार के रूप में बनाई है. सीएम सरमा ने असम को एक आधुनिक औद्योगिक केंद्र के रूप में पेश किया. उन्होंने असम में इंफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन और हेल्थकेयर सर्विस को बेहतर बनाया.
इससे असम में बीजेपी की छवि बेहतर हुई. हिंमत सरकार की ओरुनोडोई जैसी कल्याणकारी योजना से अधिक संख्या में महिलाएं बीजेपी से जुड़ीं. हिमंत सरकार ने युवाओं को बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरियां दी. इससे हिमंत को युवाओं के चेहते नेता बन गए. हिंमत बेबाक छवि वाले नेता हैं. इस इस छवि ने युवाओं को पार्टी से जोड़ने में मदद की. उन्होंने चाय बागान श्रमिकों से लेकर ग्रामीण समुदायों तक अपनी पहुंच मजबूत की. हिमंत बीजेपी से पहले कांग्रेस में रह चुके हैं, ऐसे में उन्हें कांग्रेस की कमजोरियों का सटीक अंदाजा रहता है.
हिमंत बिस्वा सरमा असम में एनडीए से जुड़ीं क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन को कुशलता से संभाला. हिमंत बिस्वा सरमा ने असम में जाति, माटी और भेटी के मुद्दे को आक्राम अंदाज में उठाया है. सीएम सरमा के अवैध प्रवासियों और जनसांख्यिकीय बदलाव के मुद्दों पर सख्त रुख ने हिंदू मतदाताओं को बीजेपी के पक्ष में एकजुट करने में मदद की. असम में भाजपा की जीत की हैट्रिक बताती है कि यहां लोगों को हिमंत की सरकार और बीजेपी के विकाय कार्यों पर भरोसा है.

