कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि केस के का अनुसंधान सही ढंग से नहीं किया गया है. कई साक्ष्यों को नहीं दिखाया गया है. कोर्ट ने एसएसपी को निर्देश दिया कि वह इस केस के ट्रायल के दौरान प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के रिकॉर्ड का अध्ययन कर 30 नवंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करें. अब मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी.
कोर्ट ने एसएसपी यह भी देखने को कहा है कि अनुसंधान में कहां-कहां और क्या-क्या त्रुटि रही है. कोर्ट ने अगली सुनवाई 30 नवंबर को भी रांची एसएसपी को हाजिर रहने को कहा है. इससे पहले सुनवाई के दौरान रांची एसएसपी ने बताया कि मामले के एक अनुसंधानकर्ता को निलंबित कर दिया गया है. वहीं, दूसरे अनुसंधानकर्ता को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया है.
प्रतिवादी तुषार कांति दास की ओर से अधिवक्ता अनुराग कश्यप ने पक्ष रखा. वहीं सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित राय ने पक्ष रखा. बता दें कि मामले में अपर न्याययुक्त शैलेन्द्र कुमार की कोर्ट ने अभिषेक सिंह उर्फ विक्की समेत 10 दोषियों को 9-9 साल की सजा सुनाई थी. साथ ही उनपर 50 -50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था.
इन सभी को गैर इरादतन हत्या एवं आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया था. जिन 10 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी, उनमें अभिषेक सिंह, अशोक कुमार सिंह, मोहम्मद शामिरूदीन, प्रतीक, मृत्युंजय कुमार, प्रकाश कुमार, दिवाकर उपाध्याय, अलोक दीवा, पंकज कुमार और सुमित कुमार शामिल हैं.
क्या है मामला
दरअसल , मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने संदीप प्रमाणिक की 26 मई 2024 की देर रात एक्सट्रीम बार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जानकारी के अनुसार, युवकों की बार के स्टाफ से किसी बात को लेकर विवाद हो गया. विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हुई. हालांकि उस वक्त मामला सुलझ गया और सभी युवक वहां से चले गए. अभिषेक ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर मारपीट का बदला लेने का प्लान बनाया.
अभिषेक सिंह सेल सिटी स्थित अपने किराए के घर से राइफल निकालकर दोबारा बार पहुंचा और संदीप को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी. घटना को अंजाम देने के बाद अभिषेक पार्किंग से बार में कई राउंड फायरिंग की और कार से भाग निकला था. इसके दूसरे दिन अहले सुबह रांची SSP और सिटी DSP मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों से पूछताछ की थी.
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें बार में हुए विवाद और गोली मारने का पूरा वीडियो कैद हुआ था, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच की और मामले के मुख्य आरोपी समेत 14 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

