रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुनाया. अदालत ने विवाह से इनकार करने पर सात साल के आपसी सहमति वाले रिश्ते को दुष्कर्म नहीं माना. अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों से दोनों के बीच सहमति से संबंध होने की बात सामने आती है. अदालत ने प्राथमिकी और 16 अगस्त 2024 के संज्ञान आदेश सहित पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया.
शुरुआत से शादी की नीयत नहीं थी, तभी माना जाएगा झूठा वादा
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि विवाह का वादा तभी झूठा माना जायेगा, जब वादा करते समय ही उसे पूरा करने की नीयत नहीं हो और उसी झूठे वादे के आधार पर महिला को शारीरिक संबंध के लिए तैयार किया गया हो. बाद में विवाह का वादा पूरा नहीं करना अपने आप में झूठा वादा नहीं माना जा सकता.
अदालत ने कहा कि दोनों के बीच सात साल से अधिक समय तक शारीरिक संबंध रहा. प्राथमिकी दर्ज कराने का कारण आरोपी और उसके परिवार की ओर से विवाह से इनकार करना था. आरोपों को सही मान लेने पर भी यह मामला सहमति से बने शारीरिक संबंध का ही बनता है और दुष्कर्म की धारा के तहत अपराध साबित नहीं होता. अदालत ने माना कि आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.
2016 में शादी समारोह में हुई थी दोनों की मुलाकात
शिकायत के अनुसार आरोपी और पीड़िता की मुलाकात 2016 में एक शादी समारोह में हुई थी. दोनों ने मोबाइल नंबर का आदान-प्रदान किया और बाद में उनके बीच प्रेम संबंध हो गया. पीड़िता का आरोप था कि आरोपी ने शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया. यह संबंध करीब सात साल तक चला.
शादी के लिए दबाव बनाने पर आरोपी करता रहा टालमटोल
शादी के लिए दबाव बनाने पर आरोपी उसे टालता रहा. 20 दिसंबर 2022 को आरोपी पीड़िता को लेकर रांची आया. 21 दिसंबर को एक होटल में उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया. इसके बाद आरोपी ने उससे संबंध खत्म कर लिया. दो अप्रैल 2023 को उसने अपना मोबाइल फोन भी बंद कर दिया. पीड़िता ने जब आरोपी के पिता से संपर्क किया, तो आरोप है कि आरोपी व उसके परिवार के सदस्यों ने शादी से इनकार कर दिया.

