कोडरमा: झारखंड का जंगल केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि औषधीय और पोषक वन संपदाओं के लिए भी खास पहचान रखता है. इन्हीं में एक है कोरिया फूल, जो इन दिनों कोडरमा के जंगलों में खूब नजर आ रहा है. सालभर में केवल कुछ महीने मिलने वाला यह सफेद और खुशबूदार फूल स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है. ग्रामीण इसे जंगलों से तोड़कर साग और सब्जी के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. पौष्टिकता और औषधीय गुणों से भरपूर इस फूल की मांग बाजार में भी बढ़ रही है. आइये जानते हैं इस फूल के बारे में.
जानें इस फूल की खासियत
कोडरमा के स्थानीय लोगों के अनुसार कोरिया फूल स्वादिष्ट होने के साथ शरीर के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. इसके फूलों से साग, सब्जी और कई पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं. कोरिया का पौधा आमतौर पर 8 से 10 फीट तक ऊंचा होता है. इसका तना खुरदुरा होता है. जबकि पत्तियां नुकीली और मुलायम होती हैं. इस पौधे पर खिलने वाले सफेद रंग के फूल बेहद आकर्षक और सुगंधित होते हैं.
जोड़ों की दर्द और डायबिटीज में देता है राहत
बता दें कि यह फूल सीमित समय के लिए उपलब्ध होता है. इसलिए इसकी विशेष अहमियत है. जंगलों तक पहुंच रखने वाले लोग ही इसे आसानी से प्राप्त कर पाते हैं. यही वजह है कि बाजार में पहुंचने पर इसकी कीमत 500 रुपये प्रति किलो तक हो जाती है. कृषि विज्ञान केंद्र कोडरमा के वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए.के. राय ने बताया कि कोरिया फूल न सिर्फ पौष्टिक है. बल्कि इसमें कई औषधीय गुण भी मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि इसका सेवन जोड़ों के दर्द और डायबिटीज में भी राहत देने वाला माना जाता है.
बरसात में लगा सकते हैं इसका पौधा
उन्होंने कहा कि यह जंगली पौधा होने के कारण इसकी देखभाल भी ज्यादा नहीं करनी पड़ती. लोग चाहें तो अपने खेत की मेड़, बागान या खाली जमीन पर इसकी खेती कर सकते हैं. बरसात के मौसम में जंगल या नर्सरी से पौधा मंगाकर इसे आसानी से लगाया जा सकता है.

