झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने संरक्षित वन क्षेत्र से क्रशर मशीन, पत्थर के खनन की दूरी के मामले में अपने पिछले आदेश में संशोधन किया है। अब संरक्षित वन से पत्थर खनन 400 मीटर की दूरी पर लगाए जा सकते हैं।
वहीं, क्रशर मशीन जंगल से 500 मीटर के बाद लगाने की अनुमति नहीं होगी। पहले क्रशर 400 मीटर और पत्थर खनन 500 मीटर के बाहर करने की अनुमति दी गई थी।
सरकार को हस्तक्षेप याचिका दाखिल करनी थी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वन भूमि से पत्थर खनन और क्रशर के लिए अंतरिम आदेश में संशोधन किए जाने का आग्रह किया गया। संशोधन के आग्रह का प्रार्थी आनंद कुमार ने विरोध किया। उनकी ओर से कहा गया कि मामले में सरकार को हस्तक्षेप याचिका दाखिल करनी थी या पुनर्विचार दायर किया जाना चाहिए था। लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक किलोमीटर के भीतर पहले से दी गई अनुमति का सर्वे करने को कहा है। सर्वे का रिपोर्ट एक जून तक कोर्ट में पेश करनी होगी। राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य के लिए अभी भी एक किलोमीटर बफर जोन लागू रहेगा।
18 जून को होगी अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून को होगी। तब तक यही अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी। सरकार ने संरक्षित वन से क्रशर और पत्थर खनन की दूरी को पांच सौ मीटर से घटाकर 250 मीटर कर दिया था। लेकिन इसका कोई ठोस कारण नहीं बताया था। जिस पर अदालत ने
कहा था कि संरक्षित वन से खनन और क्रशर की दूरी घटना बिना ठोस कारण के किया गया। यह निर्णय बिना उचित विचार पर्यावरण के लिए खतरनाक है। पर्यावरण को नुकसान अक्सर अपरिवर्तनीय होता है। इसलिए सतर्कता सिद्धांत लागू किया गया है।

