रांचीःशराब घोटाला मामले में फंसे राज्य सरकार के चर्चित IAS अधिकारी विनय चौबे निलंबन से मुक्त होने के बाद उन्होंने कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग में योगदान दे दिया है. कार्मिक एवं प्रशासनिक राजभाषा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इससे पहले आईएएस अधिकारी विनय चौबे को निलंबन से मुक्त करने का आदेश दिया गया था जिसके बाद गुरुवार को उन्होंने योगदान दिया है.
गौरतलब है कि विनय चौबे पिछले दिनों एक केस में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आए थे. उन्हें शराब घोटाला मामले में एसीबी की गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने निलंबित किया था. उन पर शराब घोटाले में मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनियों के साथ मिलकर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है.
20 मई 2025 को तत्कालीन उत्पाद सचिव रहे विनय कुमार चौबे हुए थे गिरफ्तार
शराब घोटाला सहित उन पर कई मामले दर्ज हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिल चुकी है. शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 20 मई 2025 को तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे को गिरफ्तार किया था. उनपर आरोप है कि उन्होंने उत्पाद नीति 2022 के तहत मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनियों को फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर काम करने की अनुमति दी, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ. इस मामले में समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण विनय चौबे को एसीबी कोर्ट से ही जमानत मिल चुकी है.
आईएएस विनय कुमार चौबे के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की ओर से कुल चार अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे. इसमें हजारीबाग वन भूमि घोटाला भी शामिल है. इस मामले में पिछले दिनों 1 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी. इसके अलावा जमीन ट्रांसफर मामला, आय से अधिक संपत्ति मामला, शराब घोटाला मामले में भी अदालत से डिफॉल्ट बेल उन्हें मिल चुकी है. उनके खिलाफ जगन्नाथपुर थाने में भी एक मामला दर्ज है.
विनय चौबे की ज्वाइनिंग से प्रशासनिक महकमे में बढ़ी हलचल
1999 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी विनय कुमार चौबे के निलंबन मुक्त होने के बाद योगदान देते ही प्रशासनिक गलियारों में गुरुवार को हलचल देखा गया. धुर्वा स्थित झारखंड मंत्रालय में उन्हें एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा हो रही है. विनय चौबे अब तक राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं. इससे पहले वे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के अलावा जल संसाधन, योजना-सह-वित्त और आबकारी जैसे प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.

