रेल मंत्रालय ने झारखंड और पश्चिम बंगाल की रेल संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। इसमें तीन महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को रेलवे अधिनियम 1989 के तहत स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट घोषित किया है।
इस फैसले के बाद इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण, वन एवं पर्यावरण संबंधी मंजूरियों सहित अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी, जिससे निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा हो पाएगा।
विशेष रेलवे परियोजना का दर्जा पाने वाली परियोजनाओं में चांडिल (गुंडाबिहार)-मुरी दोहरीकरण (59.49 किमी), नीमपुरा वेस्ट आउटर केबिन-मिदनापुर तीसरी रेल लाइन (14.517 किमी) व चांडिल-अनारा-बर्नपुर (दामोदर तक) चौथी रेल लाइन (115.36 किमी) शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से दक्षिण-पूर्व रेलवे के व्यस्त रेल मार्गों की क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की रफ्तार में सुधार होगा और माल तथा यात्री ट्रेनों का परिचालन अधिक सुचारु हो सकेगा।
चांडिल-मुरी दोहरीकरण परियोजना से झारखंड के रांची, टाटानगर और आद्रा रेल मंडल के बीच रेल यातायात को नई गति मिलेगी। वहीं, नीमपुरा वेस्ट आउटर केबिन-मिदनापुर तीसरी लाइन बनने से खड़गपुर मंडल के अत्यधिक व्यस्त रेलखंड पर दबाव कम होगा और लंबी दूरी की यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों का संचालन भी अधिक समयबद्ध हो सकेगा।
सबसे महत्वपूर्ण परियोजना चांडिल-अनारा-बर्नपुर (दामोदर तक) चौथी रेल लाइन है। यह परियोजना झारखंड के सरायकेला-खरसावां व पश्चिम बंगाल के पुरुलिया और पश्चिम बर्दवान जिलों से होकर गुजरेगी।
इसके पूरा होने से हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल कॉरिडोर की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही इस्पात, कोयला, लौह अयस्क और अन्य औद्योगिक उत्पादों की ढुलाई तेज एवं अधिक किफायती होगी, जिससे क्षेत्र के औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।

