पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को टेंडर घोटाले से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली. इस फैसले के बाद अब पूर्व मंत्री के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है. करीब दो वर्षों से न्यायिक हिरासत में बंद आलमगीर आलम के लिए यह फैसला बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है.
मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच में हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने आलमगीर आलम की ओर से पेश की गई दलीलों पर विचार किया और उनकी जमानत याचिका को मंजूरी दे दी. हालांकि अदालत की ओर से जमानत की शर्तों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है.
इससे पहले 11 जुलाई 2025 को झारखंड उच्च न्यायालय ने आलमगीर आलम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट के न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था. हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद आलमगीर आलम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
बताया जाता है कि पिछली सरकार में मंत्री रहे आलमगीर आलम को Enforcement Directorate ने पिछले वर्ष 15 मई को गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी ने उन पर टेंडर घोटाले के जरिए करोड़ों रुपये की कथित मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप लगाया था. यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब ईडी ने राज्य में कई स्थानों पर छापेमारी की कार्रवाई की थी.
ईडी की जांच के दौरान आलमगीर आलम के आप्त सचिव संजीव कुमार लाल और उनके घरेलू सहायक जहांगीर आलम के ठिकानों से लगभग 32.30 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे. इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी सुर्खियां बटोरी थीं.
नकदी बरामदगी के बाद ईडी ने मामले को गंभीर मानते हुए आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था.
गिरफ्तारी के बाद से ही आलमगीर आलम न्यायिक हिरासत में थे. अब सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है. इस फैसले के बाद झारखंड की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है और मामले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.

