Close Menu
कोयलाचंल संवाद

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    झारखंड में मौसम का बड़ा अलर्ट! 20 जिलों में आंधी-बारिश और वज्रपात का खतरा, IMD की चेतावनी

    June 27, 2026

    तेज प्रताप यादव के घर चोरी मामला: गवाह के परिवार को मिली धमकी, ड्राइवर ने मांगी पुलिस सुरक्षा

    June 27, 2026

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 8 आरोपी न्यायिक हिरासत में, चंपत राय के इस्तीफे की खबरों का ट्रस्ट ने किया खंडन

    June 27, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    • E-Paper
    • ताजा हिंदी खबरें
    • झारखंड
    • रांची
    Facebook X (Twitter) Instagram
    कोयलाचंल संवादकोयलाचंल संवाद
    Subscribe
    • कोयलांचल संवाद
    • झारखण्ड
    • बिहार
    • राष्ट्रीय
    • बिज़नेस
    • नौकरी
    • मनोरंजन
    • अंतरराष्ट्रीय
    • खेल
    • E-Paper
      • E-paper Dhanbad
      • E-Paper Ranchi
    कोयलाचंल संवाद
    Home»Breaking News»जयपाल मुंडा, एक ऐसे आदिवासी नेता जिन्होंने झारखंड की मांग सुभाष चंद्र बोस से की थी
    Breaking News

    जयपाल मुंडा, एक ऐसे आदिवासी नेता जिन्होंने झारखंड की मांग सुभाष चंद्र बोस से की थी

    AdminBy AdminJanuary 3, 2025No Comments6 Mins Read
    WhatsApp Facebook Twitter Copy Link Pinterest Email
    Share
    WhatsApp Facebook Twitter Copy Link Pinterest Email

    Jaipal Singh Munda: जयपाल सिंह मुंडा का जन्म 3 जनवरी 1903 को झारखंड (तत्कालीन बंगाल प्रेसिडेंसी) के खूंटी जिले के टकरा गांव में हुआ था। जयपाल सिंह को ‘मरांग गोमके’ (महान नेता) भी कहा जाता है। उनके बचपन का नाम प्रमोद पाहन था। जयपाल सिंह के पिता का नाम अमरू पाहन तथा माता का नाम राधामणी था। जयपाल सिंह मुंडा की शुरूआती शिक्षा रांची के सेंट पॉल स्कूल से हुई। 1918 में वे अपने स्कूल के प्रिंसिपल के साथ इंग्लैंड चले गये। 1920 में उनका कैंटरबरी के सेंट ऑगस्टाइन कॉलेज में नामांकन हुआ। इसके बाद ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सेंट जॉन्स कॉलेज में उन्होंने दाखिला लिया। यहीं से 1926 में अर्थशास्त्र में उन्होंने स्नातक किया। 1928 में उनका चयन भारतीय सिविल सेवा (आईसीएस) में हो गया।

    हॉकी में दिलाई भारत को पहचान

    जब वे एक वर्ष के लिए आईसीएस की ट्रेनिंग पर इंग्लैण्ड गये, उसी साल उन्हें ऑक्सफोर्ड हॉकी टीम का कप्तान बनाया गया। वे हॉकी के अच्छे खिलाडी थे, इसलिये ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने उन्हें 1925 में ‘ऑक्सफोर्ड ब्लू’ की उपाधि दी। यह उपाधि पाने वाले वे हॉकी के एक मात्र अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी थे। ट्रेनिंग के साथ-साथ हॉकी के खेल पर भी ध्यान रखना, उनके लिये मुसीबत का काम बन गया। दरअसल, उन्हें हॉकी खेलने के लिए छुट्टी नहीं मिल पा रही थी। उनके पास अब दो ही विकल्प थे। एक तो वे आईसीएस में नौकरी करें या फिर हॉकी खेलें। ऐसे में उन्होंने हॉकी को ही अपनी पहली पसंद बनाया। उनका यह चुनाव सफल रहा और 1928 में एम्स्टर्डम में आयोजित ओलम्पिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम की अगुवाई का जिम्मा संभाला। भारत की टीम ने जयपाल सिंह की कप्तानी में ओलम्पिक में कुल 17 मैच खेलें, जिसमें 16 मैचों में जीत दर्ज की। एक मैच विवादित रूप से ड्रा रहा, जिसके चलते जयपाल सिंह ने नॉकआउट मैचों से खुद को दूर कर लिया। हालांकि, फाइनल मुकाबला भारत ने हॉलैंड को 3-0 से हराकर ओलम्पिक गोल्ड अपने नाम किया।

    हॉकी के बाद कुछ दिनों तक नौकरी की

    जयपाल सिंह ने लंबे समय तक हॉकी नहीं खेली लेकिन अपने अनुभवों को नये खिलाडियों के साथ जरुर साझा करते रहे। जीवनयापन करने के लिये जयपाल सिंह मुंडा ने कोलकाता में बर्मा शेल ऑयल कंपनी में काम किया। उन्होंने कुछ समय घाना (अफ्रीका) के एक कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक के रूप में भी काम किया। फिर एक वर्ष के लिए उन्होंने रायपुर के राजकुमार कॉलेज में प्रिंसिपल के रूप में कार्य किया। इसके बाद, कुछ वर्षों तक वे बीकानेर स्टेट के वित्त और विदेश मामलों के मंत्री रहे।

    वनवासी इलाकों में सबसे बड़े नेता बनकर उभरे

    उन दिनों, 1938 में बिहार से झारखंड को अलग करने की मांग में पहली बार उठनी शुरू हुई थी। इस मांग को बिना नेतृत्व वाली आदिवासी महासभा ने रखा। बिहार के तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर एमजी हलेट ने इस मांग को सिरे से ठुकरा दिया। जिसके बाद आदिवासी महासभा एकदम निष्क्रिय हो गयी। 1939 में, जब जयपाल सिंह मुंडा ब्रिटेन से भारत लौटे और उन्हें बीकानेर स्टेट में मिनिस्टर बनाया गया था। एक बार पटना जाने के लिये वे कुछ दिनों रांची में ठहरे, जहां उनकी मुलाकात आदिवासी महासभा से हुई। यहां से उन्होंने इस आन्दोलन से जुड़ने का मन बनाया और 20 जनवरी 1939 को आदिवासी महासभा ने एक बड़ी सार्वजानिक सभा का आयोजन किया और जयपाल सिंह को उसकी अध्यक्षता सौंप दी।

    इस प्रकार छोटा नागपुर क्षेत्र को पहली बार जयपाल सिंह के नेतृत्व में एक राजनैतिक नेतृत्व मिला, जो उनकी मांगों और समस्याओं को मजबूती से सरकार के सामने रख सके। जयपाल सिंह का ही करिश्मा था कि 1939 में जिला परिषद के चुनावों में आदिवासी महासभा ने रांची की 25 सीटों में से 16 और सिंहभूम की 25 में से 22 सीटों पर जीत दर्ज की।

    1940 में कांग्रेस के रामगढ़ अधिवेशन में उन्होंने सुभाष चंद्र बोस से मुलाकात कर अलग झारखंड राज्य की मांग रखी। उन्होंने विस्तार से सुभाष बाबू को विस्तार से इसकी जरूरतों के बारे में भी बताया। सुभाष बाबू ने उन्हें सुझाव दिया कि जब तक देश आजाद नहीं हो जाता, तब तक इस मामले में कुछ नहीं किया जा सकता। अतः उन्हें अभी इन्तजार करना चाहिए। जयपाल ने भी उनके इस व्यावहारिक सुझाव को स्वीकार कर लिया।

    जब देश आजाद हुआ, तो 1949 में आदिवासी महासभा को एक राजनीतिक दल – झारखंड पार्टी का स्वरुप दे दिया गया। 1952 के पहले लोकसभा चुनावों में झारखंड पार्टी मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभर कर सामने आई। पहले विधानसभा चुनावों में भी इस दल को 32 सीटें मिली। जयपाल सिंह भी चार बार संसद के लिये चुने गये। इस प्रकार लोकतांत्रिक परिवेश में जयपाल सिंह के नेतृत्व में अलग झारखंड राज्य की मांग जोर पकड़ने लगी।

    संविधान सभा में भूमिका

    1946 में जयपाल सिंह बिहार से संविधान सभा के लिए चुने गये। यहां पर उन्होंने आदिवासी समुदाय के विकास के लिये आवाज उठाई। उन्होंने 19 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में बोलते हुए कहा कि “मैं सभी से कहना चाहता हूं कि अगर कोई देश में जुल्म का शिकार हुआ है तो वे हमारे लोग हैं। हजारों वर्षों से उनकी उपेक्षा हुई है और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया है।”

    उन्होंने कहा कि “मैं जिस सिंधु घाटी सभ्यता का वंशज हूं, उसका इतिहास बताता है कि आपमें से अधिकांश लोग जो यहां बैठे हैं बाहरी हैं। जिनके कारण हमारे लोगों को अपनी धरती छोड़कर जंगलों में जाना पड़ा। इसलिए यहां जो संकल्प पेश किया जा रहा है, वह आदिवासियों को लोकतंत्र नहीं सिखा सकता। आप सभी आदिवासियों को लोकतंत्र नहीं सिखा सकते, बल्कि उनसे लोकतंत्र सीख सकते हैं। आदिवासी पृथ्वी पर सबसे लोकतांत्रिक लोग हैं।”

    उन्होंने आगे कहा कि “मैं कहूंगा कि हमारे लोगों का पूरा इतिहास गैर आदिवासियों के अंतहीन उत्पीड़न और बेदखली को रोकने का इतिहास है। मैं आप सबके कहे हुए पर विश्वास कर रहा हूं। हम लोग स्वतंत्र भारत के एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रहे हैं। जहां सभी समान होंगे। जहां सबको बराबर का अवसर मिलेगा और एक भी नागरिक उपेक्षित नहीं होगा।”

    जब कांग्रेस ने दिया धोखा

    1963 में जयपाल सिंह मुंडा ने झारखंड पार्टी का कांग्रेस में विलय इस शर्त पर कर दिया कि कांग्रेस पार्टी अलग झारखंड राज्य का निर्माण करेगी। दरअसल, प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ही उन्हें ऐसा करने के लिये कहा था। प्रधानमंत्री नेहरू ने जयपाल सिंह को भरोसा दिया कि अलग झारखंड की मांग तो विलय के बाद भी जारी रखी जा सकती है। अतः उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री विनोदानंद झा, ओडिशा के मुख्यमंत्री बीजू पटनायक, और प्रफुल्ल सेन की मौजूदगी में झारखंड पार्टी को कांग्रेस में मिला दिया। इसके बदले में उन्हें बिहार कैबिनेट में शामिल कर लिया गया।

     

    Share. WhatsApp Facebook Twitter Email Copy Link
    Admin

    Related Posts

    झारखंड में मौसम का बड़ा अलर्ट! 20 जिलों में आंधी-बारिश और वज्रपात का खतरा, IMD की चेतावनी

    June 27, 2026

    तेज प्रताप यादव के घर चोरी मामला: गवाह के परिवार को मिली धमकी, ड्राइवर ने मांगी पुलिस सुरक्षा

    June 27, 2026

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 8 आरोपी न्यायिक हिरासत में, चंपत राय के इस्तीफे की खबरों का ट्रस्ट ने किया खंडन

    June 27, 2026
    Add A Comment

    Comments are closed.

    Recent Posts
    • झारखंड में मौसम का बड़ा अलर्ट! 20 जिलों में आंधी-बारिश और वज्रपात का खतरा, IMD की चेतावनी
    • तेज प्रताप यादव के घर चोरी मामला: गवाह के परिवार को मिली धमकी, ड्राइवर ने मांगी पुलिस सुरक्षा
    • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 8 आरोपी न्यायिक हिरासत में, चंपत राय के इस्तीफे की खबरों का ट्रस्ट ने किया खंडन
    • JAC ने छात्रों को बड़ी राहत: प्रमाण पत्रों में त्रुटि सुधार की अंतिम तिथि बढ़ी, अब 30 सितंबर 2026 तक करें आवेदन
    • बिहार में चीनी उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन, नई चीनी मिलों के लिए ₹1 में मिलेगी 40 एकड़ जमीन
    • रांची में 27 जून को स्कूल रहेंगे बंद, मोहर्रम जुलूस को लेकर जिला प्रशासन का बड़ा फैसला
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo YouTube
    • E-Paper
    • Content Policy Guidelines
    • Privacy Policy
    • Terms of Use
    © 2026 Koylanchal Samvad. Designed by Aliancy Technologies.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.