झारखंड आंदोलनकारियों की विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को घाघरा प्रखंड मुख्यालय स्थित आदिवासी कला संस्कृति भवन में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता राजकुमार भगत ने की। इस दौरान आंदोलनकारियों के अधिकार, सम्मान और सरकार से लंबित मांगों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में आंदोलनकारियों ने सरकार से जेल जाने की बाध्यता समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई। आंदोलनकारियों का कहना है कि झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों को सम्मान और सुविधाएं देने के लिए मौजूदा नियमों में आवश्यक बदलाव किया जाना चाहिए। साथ ही सभी चिन्हित झारखंड आंदोलनकारियों को समान रूप से सम्मान पेंशन देने की मांग भी रखी गई।
आंदोलनकारियों ने कहा कि आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों को उनकी भूमिका के अनुरूप सम्मान मिलना चाहिए। इसके अलावा सभी चिन्हित आंदोलनकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करने की मांग पर भी चर्चा हुई।
गौरतलब है कि झारखंड आंदोलनकारियों की ओर से पिछले कुछ समय से जेल जाने की अनिवार्यता समाप्त करने और सम्मान पेंशन में समानता की मांग लगातार उठाई जा रही है। अलग-अलग जिलों में हुई बैठकों में आंदोलनकारियों ने सरकार से सम्मान, पहचान, पेंशन और उनके आश्रितों के अधिकारों को लेकर ठोस निर्णय लेने की मांग की है।
सरकार की ओर से झारखंड आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के सम्मान पेंशन तथा अन्य सुविधाओं के लिए चिन्हितीकरण की प्रक्रिया और नियम पहले से लागू हैं। जुलाई 2025 की सरकारी अधिसूचना में चिन्हित आंदोलनकारियों और आश्रितों को संबंधित नियमों के तहत सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान दर्ज है।
बैठक में आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा हुई। आंदोलनकारियों ने संगठन को मजबूत करने और अपनी मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाने पर जोर दिया। बैठक में नारायण भगत, राजकुमार भगत, मोहन भगत, ओम प्रकाश मिश्रा, मुखलाल साहू, लालदेव उरांव, विनोद भगत, दिगंबर साहू, बिरी भगत, महाजन उरांव समेत दर्जनों आंदोलनकारी मौजूद रहे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि आंदोलनकारियों की अगली बैठक 9 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी, जिसमें लंबित मांगों और आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा

