झारखंड के सिमडेगा जिले में इन दिनों जहरीले सांपों का आतंक लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. जंगल और पहाड़ों से घिरे इस जिले में बारिश शुरू होते ही सांप बड़ी संख्या में बिलों से बाहर निकल रहे हैं. साथ ही ये सांप रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहे हैं. इसके कारण सांप काटने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. हाल के दिनों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल है.
जमीन के अंदर छिपे सांप बाहर
ग्रामीणों के अनुसार, भीषण गर्मी के बाद बारिश होने से जमीन के अंदर छिपे सांप बाहर निकल आते हैं. बाहर की गर्मी और नमी से बचने के लिए ये सांप कई बार लोगों के घरों में घुस जाते हैं. ग्रामीण इलाकों में अक्सर बड़े और जहरीले सांप घरों के अंदर और आसपास देखे जा रहे हैं. ऐसे में अनजाने में लोग इनके संपर्क में आ जाते हैं और सर्पदंश का शिकार हो जाते हैं.
एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज
ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोग जमीन पर सोते हैं. इसी दौरान कई बार सांप बिस्तर तक पहुंच जाते हैं और लोगों को डंस लेते हैं. सिमडेगा सदर अस्पताल में हाल के दिनों में सांप काटने के एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें छह से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. यह आंकड़ा सिर्फ सदर अस्पताल का है. पूरे जिले में सर्पदंश के मामलों और मौतों की संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है.
ग्रामीण इलाकों में फैला अंधविश्वास
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कई मामलों की जानकारी सरकारी रिकॉर्ड तक नहीं पहुंच पाती. इसका सबसे बड़ा कारण ग्रामीण इलाकों में फैला अंधविश्वास है. सांप काटने के बाद लोग पहले अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक और ओझा-गुनी का सहारा लेते हैं. जब मरीज की हालत गंभीर हो जाती है, तब उसे अस्पताल लाया जाता है. कई बार इलाज में देरी होने के कारण मरीज की जान नहीं बच पाती.
जागरूक करने के लिए अभियान
सिविल सर्जन ने बताया कि जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश के इलाज के लिए जरूरी दवाएं और एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध हैं. डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी ऐसे मामलों से निपटने के लिए तैयार रखा गया है. साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है.

