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    Home»Breaking News»रिम्स-2 निर्माण के खिलाफ आदिवासी और किसान एकजुट, मोराबादी में विशाल धरना
    Breaking News

    रिम्स-2 निर्माण के खिलाफ आदिवासी और किसान एकजुट, मोराबादी में विशाल धरना

    AdminBy AdminJune 12, 2026No Comments6 Mins Read
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    रांची/कांके: झारखंड की राजधानी रांची में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना को लेकर विरोध अब और तेज होता दिखाई दे रहा है। नगड़ी की उपजाऊ कृषि भूमि पर बनने वाले रिम्स-2 के खिलाफ गुरुवार को हजारों ग्रामीण, किसान, आदिवासी समाज के लोग और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि सड़क पर उतर आए। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी नगड़ी से मुख्यमंत्री आवास तक शांति मार्च निकालने के लिए निकले, लेकिन प्रशासन द्वारा विभिन्न स्थानों पर रोक लगाए जाने के बावजूद वे खेतों, पगडंडियों और नदी के रास्तों से होते हुए मोराबादी स्थित ऑक्सीजन पार्क तक पहुंच गए।

     

    इस दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई थी और पुलिस बल तैनात था, लेकिन आंदोलनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन, खेती और भविष्य की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

     

    ऑक्सीजन पार्क के पास रोका गया मार्च

     

    प्रदर्शनकारियों का काफिला जैसे ही मोराबादी स्थित ऑक्सीजन पार्क के समीप पहुंचा, प्रशासन ने वहां बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद हजारों की संख्या में मौजूद ग्रामीण वहीं धरने पर बैठ गए।

     

    धरना स्थल पर महिलाओं, युवाओं, किसानों और आदिवासी समुदाय के लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। कई लोग अपने पारंपरिक परिधान में पहुंचे थे और हाथों में तख्तियां लेकर सरकार से अपनी जमीन बचाने की मांग कर रहे थे।

     

    प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी लड़ाई किसी विकास परियोजना के खिलाफ नहीं है, बल्कि अपनी आजीविका और अस्तित्व को बचाने के लिए है।

     

    उपजाऊ कृषि भूमि पर रिम्स-2 निर्माण का विरोध

     

    आंदोलनकारियों का मुख्य आरोप है कि सरकार विकास के नाम पर किसानों की सबसे उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण कर रही है।

     

    ग्रामीणों के अनुसार नगड़ी क्षेत्र की जमीन केवल जमीन नहीं बल्कि सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार है। यहां वर्षों से किसान खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते आ रहे हैं।

     

    किसानों का कहना है कि जिस भूमि पर रिम्स-2 निर्माण की योजना बनाई गई है, वहां धान, सब्जियां और अन्य कृषि फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। यदि यह जमीन अधिग्रहित हो जाती है तो बड़ी संख्या में किसान और मजदूर प्रभावित होंगे।

     

    ग्रामीणों का कहना है कि खेती खत्म होने के बाद उनके सामने रोजगार और जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

     

    स्वास्थ्य सुविधाओं के विरोधी नहीं हैं ग्रामीण

     

    धरना स्थल पर मौजूद कई ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे रिम्स-2 या स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के विरोधी नहीं हैं।

     

    उनका कहना है कि राज्य में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरत है और नए अस्पताल बनने चाहिए, लेकिन इसके लिए किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण उचित नहीं है।

     

    ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब राज्य में कई स्थानों पर गैर-कृषि और बंजर भूमि उपलब्ध है, तो फिर उपजाऊ कृषि भूमि को ही क्यों चुना जा रहा है।

     

    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को वैकल्पिक भूमि की तलाश करनी चाहिए ताकि विकास और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।

     

    आदिवासी समाज की बड़ी भागीदारी

     

    इस आंदोलन में आदिवासी समाज की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कई आदिवासी संगठनों ने इसे जल, जंगल और जमीन की लड़ाई बताते हुए आंदोलन को समर्थन दिया।

     

    आदिवासी नेताओं का कहना है कि जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनकी पहचान, संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। ऐसे में बिना उनकी सहमति के जमीन अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा।

     

    उन्होंने कहा कि संविधान और कानून आदिवासी समुदायों को भूमि संबंधी विशेष अधिकार प्रदान करते हैं और इन अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।

     

    प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच टकराव की स्थिति

     

    मार्च को रोकने के लिए प्रशासन ने पहले से व्यापक तैयारी कर रखी थी। कई प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया था और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया गया।

     

    हालांकि आंदोलनकारियों ने खेतों और नदी के रास्तों का इस्तेमाल कर मोराबादी तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

     

    इस दौरान कहीं से किसी बड़े हिंसक टकराव की सूचना नहीं मिली, लेकिन स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा।

     

    अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

     

    आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी

     

    धरना स्थल पर मौजूद आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

     

    ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में गांव-गांव बैठकें आयोजित की जाएंगी और जनसमर्थन बढ़ाया जाएगा।

     

    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल नगड़ी की लड़ाई नहीं बल्कि किसानों और आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई है।

     

    रिम्स-2 परियोजना क्यों है महत्वपूर्ण?

     

    सरकार की ओर से प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना को राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

     

    रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) पर बढ़ते मरीजों के दबाव को देखते हुए नए चिकित्सा संस्थान की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।

     

    विशेषज्ञों का मानना है कि रिम्स-2 बनने से राज्य के लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होंगे।

     

    हालांकि भूमि अधिग्रहण को लेकर पैदा हुए विवाद ने परियोजना के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

     

    सरकार के सामने बड़ी चुनौती

     

    एक ओर सरकार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर किसानों और ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है।

     

    राजनीतिक और सामाजिक जानकारों का मानना है कि सरकार को इस मुद्दे पर संवाद और सहमति का रास्ता अपनाना होगा।

     

    यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

     

    फिलहाल नगड़ी से मोराबादी तक पहुंचे हजारों ग्रामीणों ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अपनी उपजाऊ जमीन बचाने की लड़ाई जारी रखेंगे। अब सभी की नजर सरकार की अगली रणनीति और आंदोलनकारियों की आगामी घोषणा पर टिकी हुई है।

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