Close Menu
कोयलाचंल संवाद

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    बिहार में चीनी उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन, नई चीनी मिलों के लिए ₹1 में मिलेगी 40 एकड़ जमीन

    June 26, 2026

    रांची में 27 जून को स्कूल रहेंगे बंद, मोहर्रम जुलूस को लेकर जिला प्रशासन का बड़ा फैसला

    June 26, 2026

    रामगढ़ सड़क हादसे में 8 लोगों की मौत, CM हेमंत सोरेन ने जताया शोक

    June 26, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    • E-Paper
    • ताजा हिंदी खबरें
    • झारखंड
    • रांची
    Facebook X (Twitter) Instagram
    कोयलाचंल संवादकोयलाचंल संवाद
    Subscribe
    • कोयलांचल संवाद
    • झारखण्ड
    • बिहार
    • राष्ट्रीय
    • बिज़नेस
    • नौकरी
    • मनोरंजन
    • अंतरराष्ट्रीय
    • खेल
    • E-Paper
      • E-paper Dhanbad
      • E-Paper Ranchi
    कोयलाचंल संवाद
    Home»Breaking News»बालू खनन पर 4 महीने की रोक, अवैध कारोबारियों पर रहेगी प्रशासन की नजर
    Breaking News

    बालू खनन पर 4 महीने की रोक, अवैध कारोबारियों पर रहेगी प्रशासन की नजर

    AdminBy AdminJune 10, 2026Updated:June 10, 2026No Comments6 Mins Read
    WhatsApp Facebook Twitter Copy Link Pinterest Email
    Share
    WhatsApp Facebook Twitter Copy Link Pinterest Email

    रांची: झारखंड में आज से बालू खनन और बालू उठाव पर पूरी तरह रोक लागू हो गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों के तहत राज्य की सभी नदियों से बालू खनन, भंडारण और परिवहन पर 15 अक्टूबर तक प्रतिबंध रहेगा। इस दौरान राज्य के सभी 444 बालू घाट बंद रहेंगे और किसी भी नदी घाट से बालू निकालने या उसके परिवहन की अनुमति नहीं होगी।

    हर वर्ष की तरह इस बार भी मॉनसून सीजन के दौरान पर्यावरण संरक्षण और नदियों के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से यह फैसला लागू किया गया है। राज्य सरकार और खनन विभाग ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि प्रतिबंध अवधि के दौरान अवैध खनन और परिवहन पर विशेष निगरानी रखी जाए।

    यह प्रतिबंध अगले चार महीनों तक प्रभावी रहेगा और 15 अक्टूबर के बाद परिस्थितियों की समीक्षा कर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

    क्यों लगाई जाती है बालू खनन पर रोक?

    मॉनसून के दौरान नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है। भारी बारिश के कारण नदी का बहाव तेज हो जाता है और ऐसे समय में बालू खनन करना पर्यावरणीय और सुरक्षा दोनों दृष्टिकोण से जोखिम भरा माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार वर्षा ऋतु में बालू खनन से नदी की संरचना प्रभावित होती है। इससे नदी तटों का कटाव बढ़ सकता है और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाता है।

    इसी वजह से एनजीटी ने देशभर के कई राज्यों में मानसून अवधि के दौरान नदी घाटों से बालू खनन पर रोक लगाने की व्यवस्था की है। झारखंड में भी इसी नियम का पालन किया जाता है।

    444 बालू घाटों पर पूरी तरह ताला

    खनन विभाग के आंकड़ों के अनुसार झारखंड में वर्तमान समय में 444 बालू घाट संचालित हैं। इन सभी घाटों पर 10 जून से 15 अक्टूबर तक खनन गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी।

    इस अवधि में किसी भी व्यक्ति, कंपनी या एजेंसी को बालू निकालने, स्टॉक करने या परिवहन करने की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंध के बावजूद बालू खनन या परिवहन करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    राज्य सरकार ने जिला प्रशासन, पुलिस और खनन विभाग को संयुक्त रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।

    पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी कदम

    पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों से अनियंत्रित बालू खनन पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

    बालू नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह भूजल स्तर को बनाए रखने, नदी के किनारों को सुरक्षित रखने और जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास को संरक्षित करने में मदद करती है।

    यदि वर्षा ऋतु में बड़े पैमाने पर बालू निकाली जाए तो नदी का प्राकृतिक ढांचा बिगड़ सकता है। इससे जलधारण क्षमता प्रभावित होती है और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ जाता है।

    इसी कारण मॉनसून सीजन में खनन गतिविधियों पर रोक को पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक कदम माना जाता है।

    निर्माण कार्यों पर पड़ सकता है असर

    बालू खनन पर रोक का सबसे अधिक असर निर्माण क्षेत्र पर पड़ने की संभावना है।

    झारखंड में बड़ी संख्या में सरकारी और निजी निर्माण परियोजनाएं चल रही हैं। सड़क, पुल, भवन, आवास और अन्य निर्माण कार्यों में बालू एक महत्वपूर्ण सामग्री है।

    चार महीने तक बालू घाट बंद रहने से बाजार में बालू की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इससे कीमतों में वृद्धि होने की आशंका भी जताई जा रही है।

    निर्माण व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि पर्याप्त मात्रा में पहले से स्टॉक उपलब्ध नहीं हुआ तो कई परियोजनाओं की गति धीमी पड़ सकती है।

    अवैध खनन पर रहेगी प्रशासन की नजर

    हर वर्ष बालू खनन पर प्रतिबंध के दौरान अवैध खनन की शिकायतें सामने आती हैं।

    इसी को देखते हुए इस बार प्रशासन ने पहले से ही कड़ी निगरानी की तैयारी की है। सभी जिलों के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और जिला खनन पदाधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।

    प्रशासन द्वारा नदी घाटों पर नियमित निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही ड्रोन, सीसीटीवी और अन्य तकनीकी संसाधनों की मदद से भी निगरानी की जा सकती है।

    अधिकारियों का कहना है कि अवैध खनन या परिवहन में शामिल लोगों के खिलाफ खनन अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    बालू कारोबारियों के लिए चुनौतीपूर्ण समय

    चार महीने की बंदी बालू कारोबारियों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए भी चुनौती लेकर आई है।

    बालू खनन से जुड़े हजारों मजदूर, ट्रैक्टर चालक, ट्रक मालिक और अन्य लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर हैं।

    प्रतिबंध अवधि के दौरान इन लोगों की आय प्रभावित हो सकती है। हालांकि सरकार का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है और नियमों का पालन सभी को करना होगा।

    15 अक्टूबर के बाद होगी समीक्षा

    खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार 15 अक्टूबर के बाद मौसम और नदी की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

    यदि परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत बालू घाटों को फिर से संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है।

    हालांकि अंतिम निर्णय एनजीटी के दिशा-निर्देशों और राज्य सरकार की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।

    नागरिकों से सहयोग की अपील

    प्रशासन ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि यदि कहीं अवैध बालू खनन या परिवहन की जानकारी मिले तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

    सरकार का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन की कोशिश

    विशेषज्ञों का कहना है कि बालू खनन पर मौसमी रोक पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास है।

    एक ओर जहां निर्माण गतिविधियों के लिए बालू आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर नदियों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।

    मॉनसून के दौरान खनन गतिविधियों पर रोक लगाकर सरकार और एनजीटी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रह सकें।

    फिलहाल झारखंड में अगले चार महीनों तक सभी 444 बालू घाट बंद रहेंगे और प्रशासन अवैध खनन पर सख्त नजर रखेगा। अब सभी की निगाहें 15 अक्टूबर के बाद होने वाली समीक्षा पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि राज्य में बालू खनन गतिविधियां दोबारा कब शुरू होंगी।

    Share. WhatsApp Facebook Twitter Email Copy Link
    Admin

    Related Posts

    बिहार में चीनी उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन, नई चीनी मिलों के लिए ₹1 में मिलेगी 40 एकड़ जमीन

    June 26, 2026

    रांची में 27 जून को स्कूल रहेंगे बंद, मोहर्रम जुलूस को लेकर जिला प्रशासन का बड़ा फैसला

    June 26, 2026

    रामगढ़ सड़क हादसे में 8 लोगों की मौत, CM हेमंत सोरेन ने जताया शोक

    June 26, 2026
    Add A Comment

    Comments are closed.

    Recent Posts
    • बिहार में चीनी उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन, नई चीनी मिलों के लिए ₹1 में मिलेगी 40 एकड़ जमीन
    • रांची में 27 जून को स्कूल रहेंगे बंद, मोहर्रम जुलूस को लेकर जिला प्रशासन का बड़ा फैसला
    • रामगढ़ सड़क हादसे में 8 लोगों की मौत, CM हेमंत सोरेन ने जताया शोक
    • झारखंड की छात्राओं को बड़ा तोहफा! नवंबर से मिलेंगे मुफ्त सैनिटरी पैड, खुलेंगे 100 नए उत्कृष्ट स्कूल
    • रांची में मुहर्रम को लेकर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी, शुक्रवार-शनिवार इन रास्तों पर नहीं चलेगी गाड़ियां
    • Koylanchal Samvad e-paper | 26th June | Dhanbad
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo YouTube
    • E-Paper
    • Content Policy Guidelines
    • Privacy Policy
    • Terms of Use
    © 2026 Koylanchal Samvad. Designed by Aliancy Technologies.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.